गिरिडीह. अनुमंडल कृषि प्रक्षेत्र, पचंबा, गिरिडीह में जिला स्तरीय रबी कार्यशाला 2025 का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि के रुप में डीसी सह जिला दंडाधिकारी रामनिवास यादव के साथ-साथ कृषि संबद्ध विभाग के पदाधिकारी एवं प्रगतिशील कृषकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. इस दौरान डीसी ने उपस्थित सभी जिला स्तरीय पदाधिकारियों एवं प्रखंड स्तरीय प्रसार कर्मियों एवं प्रगतिशील किसानों को मार्गदर्शन दिया. बताया गया कि कार्यशाला में जो अलग-अलग विभाग के पदाधिकारियों द्वारा योजनाओं का विस्तृत जानकारी दी जा रही है, उसका किसान जागृत होकर लाभ लें. पुराने समय में सिंचाई व्यवस्था के बारे में उसके बाद बोरिंग, बूंद-बूंद सिंचाई कर किसान तकनीकी अपनाकर कैसे आगे बढ़े, की जानकारी दी गई. इसके अतिरिक्त डीसी द्वारा मत्स्य विभाग द्वारा संचालित वेद व्यास योजना के बारे में, सहकारिता विभाग द्वारा बिरसा फसल बीमा योजना के वारे में भी बताया गया. किसान केसीसी का लाभ लें एवं निर्धारित समय पर जमा करें जिससे उनको और अधिक राशि मिल सकेगी, अन्यथा ब्याज अधिक भरना पड़ता है. जिला कृषि पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में रबी मौसम में गेहूं 14000 हे०, सरसो / राई 27000 हे०, मक्का 500 हैं, चना 15000 हे०, मसूर 2200 हे० आच्छादन का लक्ष्य है. विभाग द्वारा बिरसा बीज उत्पादन, विनिमय वितरण की योजना अन्तर्गत 50 प्रतिशत अनुदान पर जिला के विभन्न लैम्प्स/पैक्स द्वारा गेहूं 5935.20 क्वी.. चना 102 क्वी एवं सरसों 94 क्वी. वितरण किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त शत प्रतिशत अनुदान पर बिरसा फसल विस्तार योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत चना, मसूर, नेशनल मिशन ऑन इडियल ऑयल-ऑयल सीड के तहत सरसो बीज का वितरण ऑन लाईन ओटीपी के माध्यम से ब्लॉक चेन टेक्नोलोजी एवं कृषि मेपर ऐप के माध्यम से किया जा रहा है. जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि 15 दिसंबर से गिरिडीह जिला में 58 केंद्रों पर धान अधिप्राप्ति किया जायेगा जिसके लिये 2450 प्रति क्विंटल निर्धारित है. किसान धान बेचने हेतु अपना निबंधन कराएं. इसके साथ-साथ इनके द्वारा बाताया गया कि रबी मौसम में फसलों का बीमा कराया जा रहा है. मात्र एक रुपये टोकन मनी के साथ किसान प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान का लाभ हेतु अपना फसल का बीमा अवश्य कराएं. जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी, जिला गव्य विकास पदाधिकारी, सहायक मिट्टी रसायनज्ञ, कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी द्वारा विभागीय संचालित योजनाओं को विस्तार पूर्वक बताया गया.
