महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला

गिरिडीह

गिरिडीह. गिरिडीह जिले के नगर भवन में सोमवार को समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के उन्मूलन, बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम तथा महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एकदिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया. उक्त कार्यशाला का उपायुक्त, रामनिवास यादव द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाना, बाल विवाह उन्मूलन हेतु कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त, रामनिवास यादव ने कहा कि परंपरा तब तक सम्मान योग्य है जब तक वह मानव गरिमा की रक्षा करे. बाल विवाह के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आज देश में बाल विवाह रोकने के लिए कानून का शक्ति से पालन किया जा रहा है. कानून ने निर्धारित किया है कि बाल विवाह के लिए लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु 21वर्ष से कम होती है तो उसे बाल विवाह माना जाता है. बाल विवाह रोकने के लिए पंचायत से लेकर जिला तक कई सारे बाल विवाह निषेध पदाधिकारी की घोषणा की गई है. जरूरत है हमें बाल विवाह के विरुद्ध आवाज बुलंद करने की और आगे आने की. आने वाले समय में हम वचनबद्ध है कि गिरिडीह जिले को बाल विवाह मुक्त जिला घोषित करके दिखाएंगे. इसके लिए हमें जो पहल करनी होगी उसके लिए पूरा जिला प्रशासन, जिला पुलिस प्रशासन और सभी सरकारी तंत्र अपनी कमर कस ले. अगर कोई भी व्यक्ति मुझे बाल विवाह की सूचना देता है तो मैं स्वयं जाकर उस बाल विवाह को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हूं. आगे उपायुक्त ने कहा कि हम सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं. सरकार द्वारा महिलाओं को दिए जाने वाले अधिकार और कई सरकारी योजनाओं का लाभ पाकर आज हमारे राज्य की महिलाएं सशक्त हुईं हैं. आजीविका के कई साधन अपनाते हुए उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा दी है और स्वयं को सशक्त किया है. बच्चियां भी शिक्षा जगत में अपना परचम लहरा रही है. आज प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं आगे आकर काम कर रहीं हैं. यह परिणाम है सरकार का प्रयास और आपकी महत्वकांक्षाओं का जिससे आज आप बुलंदियों की सीढ़ियों पर चढ़ रहीं हैं.  परन्तु यह खेद का विषय है कि आज भी हमारे समाज में कई प्रकार की कुरीतियां व्याप्त हैं जिसमें से बाल विवाह एक गंभीर मुद्दा है. हम सभी एक मंच पर एक साथ एकजुट हुए है आवश्यकता है हमें अपने समाज से इस प्रकार की बुराइयों को खत्म करने की. सबको एकजुट होकर इससे जड़ से खत्म करने हेतु प्रयास करना होगा तभी हम एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकते हैं. बच्चे देश के भविष्य होते हैं और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है. मेरा अनुरोध होगा उन सभी अभिभावकों को से जो अभी भी इस अंधेरे में अपने बच्चों का जीवन बर्बाद कर रहे. समाज के प्रत्येक व्यक्ति की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वो इस प्रकार की घटनाओं का विरोध करें और इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें.

 

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