गिरिडीह. गिरिडीह जिले में पिछले कई माह से भाजपा जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर चल रही संसय की स्थिति लगभग खत्म हो गयी है. शाम, दाम, दंड, भेद लगाने के बाद भी भाजपा के कई बड़े नेताओं के जिलाध्यक्ष बनने का सपना लगभग खत्म हो गया है. शुक्रवार को अधिकारिक रूप से इसकी घोषणा हो जाएगी. बता दें की भाजपा इस बार जिले में दो जिलाध्यक्ष बना रही है. जिसमें तीन विधानसभा गिरिडीह, गांडेय और डुमरी के लिए महानगर जिलाध्यक्ष तो राजधनवार, जमुआ और बगोदर विद्यानसभा के लिए ग्रामीण जिलाध्यक्ष बनाया जा रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा महानगर जिलाध्यक्ष के रूप में रंजीत कुमार राय तो ग्रामीण जिलाध्यक्ष के रूप में महेंद्र वर्मा के नामों पर सहमति बन गयी है और सारी प्रक्रिया भी पूरी हो गयी है. शुक्रवार को इसकी आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि हो जाएगी. जिसके बाद विजयी जुलुस निकाला जाएगा.
- भाजपा जिला कार्यालय में हुई नामांकन की प्रकिया
गुरुवार को भाजपा जिलाध्यक्ष ले चयन को लेकर नामांकन की प्रक्रिया की गयी. जिसमें चुनाव प्रभारी के रूप में शशि भूषण भगत और संगठन चुनाव प्रभारी के रूप में अशोक उपाध्याय समेत कई भाजपाई मौजूद रहे. मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश नेतृत्व के द्वारा नामांकन के लिए दो नामों का चयन किया गया था. जिसमें महानगर जिलाध्यक्ष के लिए रंजीत कुमार राय और ग्रामीण के लिए महेंद्र वर्मा के नामों की घोषणा की गयी थी. जिसके बाद आज दोनों ने अपना – अपना नामांकन दाखिल किया.
- रंजीत कुमार राय है जिला मंत्री तो महेन्द्र वर्मा है जिला महामंत्री
बता दें की रंजीत कुमार राय भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के पद पर काबिज रह चुके है. इसके साथ ही वे वर्तमान में जिला मंत्री के पद पर काबिज है. दोनों ही पद में रहते हुए श्री राय ने पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए काफी बेहतर कार्य किये है. यही कारण है की पार्टी के शीर्ष नेताओं में इनकी अलग क्षवि है.. वंही महेंद्र वर्मा वर्तमान में जिला महामंत्री पद पर रहते हुए काफी बेहतर कार्य किये है. यही कारण है की इनकी भी क्षवि पार्टी में काफी बेहतर है. इसलिये भाजपा ने इन दोनों युवा नेताओं पर भरोषा जताते हुए दोनों के कंधे पर बड़ी जिम्मेवारी सौंप रही है.
- कई नेताओं ने लगाया था रांची से दिल्ली तक की दौड़
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा महानगर जिलाध्यक्ष और ग्रामीण जिलाध्यक्ष पद पर काबिज होने के लिए कई नेता रांची से दिल्ली तक खूब दौड़ लगा रहें रहे और नेताओं के आगे – पीछे खूब चक्कर काट रहें थे. इतना ही नहीं कई नेता तो सांसद, विधायक और पूर्व मंत्रियों से पैरवी तक करा रहें थे. लेकिन इस बार गिरिडीह में किसी भी तरह की रिस्क नहीं लेना चाह रही है. क्योंकि हाल के दिनों में गिरिडीह में भाजपा के अंदर खूब गुटबाजी हो रही है. जिसके कारण पार्टी की क्षवि भी खराब हो रही थी. अब देखना दिलचस्प होगा की जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा होने के बाद उन नेताओं का क्या होगा जो खूब – भाग दौड़ कर रहें थे.
