कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों (जजों) द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय की समीक्षा निर्वाचन आयोग का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं कर सकेगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश दिया कि न्यायिक शुचिता बनाए रखने के लिए इन फैसलों को प्रशासनिक स्तर पर बदलना वर्जित होगा.
अदालत ने जानकारी दी कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत अब तक 10.16 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों पर न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई पूरी कर ली है. कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया में कार्यपालिका के दखल को रोकने के लिए पांच बड़े निर्देश जारी किए हैं, जिसमें जजों के फैसलों के खिलाफ अपील सुनने के लिए एक अलग ‘अपीलीय निकाय’ के गठन की बात कही गई है. साथ ही, चुनाव आयोग को पोर्टल की तकनीकी बाधाओं को दूर करने और नए ‘लॉगिन आईडी’ तुरंत बनाने का निर्देश दिया गया है ताकि डाटा एंट्री में देरी न हो. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन लाखों मतदाताओं के लिए बड़ी राहत है जिनका नाम ‘विचाराधीन’ श्रेणी में था, क्योंकि अब उनके नाम पर अंतिम फैसला पूरी तरह निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा.
