जमशेदपुर. झारखंड में गहराते एलपीजी (LPG) संकट की तपिश अब बड़े औद्योगिक घरानों की रसोई तक पहुंच गई है. जमशेदपुर स्थित टाटा कमिंस कंपनी में रसोई गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण कैंटीन की व्यवस्था चरमरा गई है. गैस की खपत को कम करने के लिए कंपनी प्रबंधन ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कैंटीन के मेन्यू से ‘रोटी’ को पूरी तरह हटा दिया है. इसके स्थान पर 15 मार्च (रविवार) से 17 मार्च (मंगलवार) तक के लिए एक विशेष ‘क्राइसिस मेन्यू’ जारी किया गया है.
तीन दिनों का संशोधित भोजन चार्ट: कंपनी प्रबंधन द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, रोटी बनाने में अधिक गैस खर्च होती है, इसलिए फिलहाल चावल और कम गैस खपत वाले व्यंजनों को प्राथमिकता दी गई है:
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15 मार्च (रविवार): सुबह पोहा; भोजन में अरवा चावल, मूंग/मसूर दाल, लाल चना ग्रेवी और बूंदी रायता.
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16 मार्च (सोमवार): सुबह आलूचोप-घुघनी; भोजन में अरवा चावल, लौकी चना दाल और साग-आलू.
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17 मार्च (मंगलवार): सुबह इडली-सांभर; भोजन में जीरा राइस, सोया मटर और चोखा.
कंपनी में काम करने वाले स्थायी और प्रशिक्षु कर्मचारियों को आमतौर पर 60 रुपये प्रतिमाह के मामूली शुल्क पर पूर्ण भोजन (रोटी, चावल, दाल, सब्जी) मिलता है. प्रबंधन ने कर्मचारियों से इस आपातकालीन स्थिति में सहयोग की अपील की है और आश्वासन दिया है कि गैस की आपूर्ति सामान्य होते ही रोटियां फिर से बनने लगेंगी. बता दें कि पूरे झारखंड और बिहार में इन दिनों गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिसके कारण चतरा जैसे जिलों में उपभोक्ताओं का गुस्सा भी फूट रहा है.
