सरायकेला. जिले के कुचाई प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिजार में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है. 1957 में स्थापित इस ऐतिहासिक स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक के 118 छात्र नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ एक सहायक अध्यापक (पारा शिक्षक) महेश चंद्र लागुरी के कंधों पर है.
बदहाल शिक्षा व्यवस्था के मुख्य बिंदु:
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8 पद, सभी खाली: विद्यालय में शिक्षकों के कुल 8 पद स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय से सभी रिक्त पड़े हैं. विभाग की अनदेखी से बच्चों का भविष्य दांव पर है.
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एक कमरे में कई कक्षाएं: शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को दो-तीन कमरों में एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है. अकेले शिक्षक को हर 15-20 मिनट में क्लास बदलनी पड़ती है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता खत्म हो रही है.
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अनुपस्थिति पर तालाबंदी: अगर एकमात्र शिक्षक किसी जरूरी काम से बाहर जाते हैं, तो स्कूल का संचालन लगभग ठप हो जाता है.
स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
