नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें देश में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की गई. युद्ध के कारण एलएनजी (LNG) आपूर्ति बाधित होने से देश के यूरिया प्लांट अपनी आधी क्षमता पर काम कर रहे हैं, जिससे उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक गिर गया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 19 मार्च तक भारत के पास 61.14 लाख टन यूरिया का सुरक्षित भंडार मौजूद है, जो पिछले साल के मुकाबले अधिक है.
दूसरी ओर, ईरान-इजरायल तनाव के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित होने से आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. एलपीजी सिलेंडर के लिए गैस गोदामों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में गैस की कमी नहीं है, लेकिन एहतियातन शहरों में गैस रिफिल बुकिंग की अवधि बढ़ाकर 25 दिन और गांवों में 45 दिन कर दी गई है. प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऊर्जा और कृषि क्षेत्र पर युद्ध के प्रभाव को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं.
