धनबाद. अपनी कोयला संपदा के लिए विख्यात धनबाद अब वायु प्रदूषण के मामले में भी प्रदेश में शीर्ष पर पहुंच गया है. स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित संस्था ‘आईक्यूएयर’ (IQAir) की आठवीं वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में धनबाद का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 124 दर्ज किया गया है, जो झारखंड के सभी 24 जिलों में सर्वाधिक है. रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, यहां पीएम 2.5 का स्तर 44.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानकों से लगभग नौ गुना अधिक है. यह स्थिति जिले के लाखों निवासियों के फेफड़ों और हृदय स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित कोयला खनन, भारी वाहनों द्वारा कोयले की ढुलाई, बढ़ता जनसंख्या घनत्व और औद्योगिक उत्सर्जन इस जहरीली हवा के मुख्य कारक हैं. धनबाद के शहरी क्षेत्र सहित झरिया, कतरास, निरसा और गोविंदपुर जैसे 12 प्रमुख इलाके ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता की श्रेणी में हैं. हालांकि, तोपचांची (106 AQI) की स्थिति अन्य क्षेत्रों के मुकाबले थोड़ी बेहतर है, लेकिन वह भी सुरक्षित दायरे से बाहर है.
प्रदूषण के प्रमुख आंकड़े और प्रभाव:
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औसत AQI (2025): 124 (झारखंड में सबसे खराब)
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PM 2.5 स्तर: 44.9 µg/m³ (WHO मानक 5 µg/m³ से 9 गुना ज्यादा)
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प्रभावित क्षेत्र: झरिया, जोड़ापोखर, जामाडोबा, मुगमा, निरसा, सिजुआ, कतरास आदि.
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स्वास्थ्य जोखिम: एसएनएमएमसीएच के अधीक्षक डॉ. डी.के. गिंदौरिया के अनुसार, पीएम 2.5 का उच्च स्तर बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ा रहा है.
झारखंड के अन्य प्रदूषित शहरों में पाकुड़ (116) और साहिबगंज (116) दूसरे स्थान पर हैं, जबकि नेतरहाट और लातेहार जैसे वन आच्छादित क्षेत्रों में हवा अब भी सांस लेने योग्य (AQI 97-98) बनी हुई है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों ने खनन क्षेत्रों में डस्ट कंट्रोल सिस्टम, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और ग्रीन कवर बढ़ाने की सख्त जरूरत बताई है.
