मिडिल ईस्ट संकट: ईरान की घेराबंदी तोड़ने के लिए अमेरिका ने तैनात की अपनी सबसे घातक ‘मरीन यूनिट’; स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर युद्ध के आसार

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वॉशिंगटन/तेहरान. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए पूर्ण घेराबंदी कर दी है. दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसकी आपूर्ति रुकने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. इस चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका ने अपनी सबसे एलीट ’24th मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट’ (MEU) के 3,500 कमांडोज को मोर्चे पर उतार दिया है.

24th MEU: समंदर और जमीन की जंग में माहिर यह यूनिट कोई साधारण सेना नहीं बल्कि एक ‘मरीन एयर-ग्राउंड टास्क फोर्स’ है, जो USS वास्प युद्धपोत पर तैनात रहती है.

  • हाईजैक रेस्क्यू: यह यूनिट ‘विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर’ (VBSS) तकनीक में माहिर है, जिससे चलते हुए जहाजों पर ऑस्प्रे विमानों के जरिए उतरकर उन्हें मिनटों में दुश्मनों से मुक्त कराया जा सकता है.

  • शहरी युद्ध: इन मरीन्स ने हाल ही में तटीय शहरों और बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए विशेष ‘अर्बन वारफेयर’ ट्रेनिंग पूरी की है.

  • हवाई ताकत: इनके पास एमवी-22बी ऑस्प्रे और हैरियर जेट्स जैसे आधुनिक विमानों का अपना विंग है.

रणनीतिक तैनाती और ऑपरेशन: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 27 मार्च को USS त्रिपोली युद्धपोत भी इस क्षेत्र में पहुंच चुका है, जो एक तैरते हुए एयरबेस की तरह काम कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक 11,000 से ज्यादा हवाई उड़ानें भरी गई हैं और ईरान के करीब 150 जहाजों को निशाना बनाया गया है.

दूसरी ओर, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड तकनीकी खराबी (लॉन्ड्री में आग और प्लंबिंग समस्या) के कारण क्रोएशिया के स्प्लिट पोर्ट पर मरम्मत के लिए खड़ा है, जिससे फिलहाल यह इस युद्ध क्षेत्र से बाहर है. अमेरिका अब अपनी अन्य स्ट्राइक ग्रुप्स के जरिए तेल मार्ग को बहाल करने की कोशिश कर रहा है.

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