रांची. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 223 इंटर कॉलेजों और हाई स्कूलों का अनुदान रोकने के फैसले ने तूल पकड़ लिया है. ‘झारखंड वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के आह्वान पर सोमवार, 30 मार्च 2026 को पूरे राज्य में शैक्षणिक हड़ताल रही. इस दौरान राज्य के लगभग 1250 संस्थानों में तालाबंदी की गई, जिससे पूरी शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई.
4 लाख छात्रों का भविष्य अधर में हड़ताल का व्यापक असर रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, रामगढ़ और साहिबगंज समेत तमाम जिलों में देखा गया. इंटर कॉलेज, हाई स्कूल, संस्कृत स्कूल और मदरसों के गेट पर ताले लटके होने के कारण करीब 4 लाख छात्र-छात्राओं को बिना पढ़े ही वापस घर लौटना पड़ा. आंदोलन में राज्यभर के लगभग 10 हजार शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए, जिन्होंने संस्थानों के बाहर धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
भेदभाव और साजिश का आरोप संघर्ष मोर्चा के नेताओं का कहना है कि विभाग ने बिना किसी ठोस आधार के 90 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों का अनुदान रोक दिया है. शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पोर्टल की तकनीकी कमियों और जियो-टैगिंग की आड़ में इन दशकों पुराने संस्थानों को बंद करने की साजिश रची जा रही है. कुछ संस्थानों को राहत देने और दूसरों को निशाना बनाने को लेकर शिक्षकों में ‘दोहरे मापदंड’ के खिलाफ भारी आक्रोश है.
अगली रणनीति: 2 अप्रैल को महाबैठक आंदोलन को और तेज करने के लिए मोर्चा ने अब कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है. इसके तहत झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है. आगामी रणनीति और आंदोलन के अगले चरण की घोषणा के लिए 2 अप्रैल 2026 को रांची के धुर्वा स्थित सर्वोदय निकेतन स्कूल में राज्यस्तरीय शिक्षक प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है.
