अबू धाबी/वॉशिंगटन. मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक और सैन्य बदलाव देखने को मिल रहा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से कूदने के संकेत दिए हैं। यदि ऐसा होता है, तो यूएई इस युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने वाला खाड़ी का पहला अरब देश बन जाएगा।
हॉर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए सैन्य विकल्प ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई अब केवल कूटनीति के भरोसे नहीं रहना चाहता। वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बलपूर्वक खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई की मंजूरी मांगी जाएगी। यूएई ने अमेरिका, यूरोप और एशिया की सैन्य शक्तियों से एक गठबंधन बनाने का आग्रह किया है ताकि समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित किया जा सके।
ईरान के सबसे ज्यादा हमले झेल चुका है यूएई युद्ध की शुरुआत से अब तक यूएई ने किसी भी अन्य खाड़ी देश के मुकाबले सबसे अधिक ईरानी हमले झेले हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
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कुल हमले: 31 मार्च 2026 तक ईरान ने यूएई पर 2,228 से अधिक हमले किए हैं।
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हथियार: इनमें 1,977 ड्रोन और 433 मिसाइलें (398 बैलिस्टिक और 19 क्रूज) शामिल हैं।
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निशाना: दुबई-अबू धाबी एयरपोर्ट, पाम जुमैरा और प्रमुख तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 11 लोगों की मौत और 178 घायल हुए हैं।
संतुलन की नीति से आक्रामकता की ओर शुरुआत में यूएई ने खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश किया था, लेकिन आर्थिक हितों पर चोट और बार-बार होते हमलों ने उसे अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया। यूएई ने अमेरिका को कुछ विवादित द्वीपों, जैसे अबू मूसा द्वीप, पर कब्जा करने का भी प्रस्ताव दिया है, जिस पर फिलहाल ईरान का नियंत्रण है।
युद्ध की दिशा और ट्रंप का बयान एक तरफ जहां यूएई आक्रामक हो रहा है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘दो-तीन हफ्तों का मामला’ बताया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान की सैन्य शक्ति और लीडरशिप लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि होर्मुज को सुरक्षित रखना केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है।
ताकत और प्रभाव यूएई के पास आधुनिक F-16 लड़ाकू विमानों का बेड़ा, उन्नत निगरानी तकनीक और जेबेल अली जैसे रणनीतिक बंदरगाह हैं। यदि यूएई युद्ध में उतरता है, तो सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों पर भी अपना रुख स्पष्ट करने का दबाव बढ़ेगा। गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में होने वाली वोटिंग के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि खाड़ी की यह आग और कितनी फैलेगी।
