पश्चिम बंगाल: कालियाचक में जजों के साथ बदसलूकी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; मालदा DM और SP को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी

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नई दिल्ली/कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच मालदा के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी की घटना ने देश के सर्वोच्च न्यायालय को झकझोर कर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए मालदा के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर भारी नाराजगी जाहिर की है।

क्या है पूरा मामला? बुधवार रात कालियाचक में तीन महिला न्यायाधीशों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को बदमाशों ने घेर लिया था। यह घेराबंदी दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई और आधी रात के बाद तक जारी रही।

  • हमले का स्वरूप: रिहाई के बाद जब जज घर लौट रहे थे, तब भी उनकी कारों पर पत्थर फेंके गए और लाठियों से हमला किया गया।

  • प्रशासन की विफलता: हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा लिखे पत्र के अनुसार, घटना की जानकारी होने के बावजूद न तो DM और न ही SP मौके पर पहुंचे। स्थिति को संभालने के लिए खुद मुख्य न्यायाधीश को डीजीपी और गृह सचिव को फोन करना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा कि यह घटना राज्य सरकार की अपने कर्तव्यों के निर्वहन में विफलता का प्रमाण है। कोर्ट ने सवाल किया कि जानकारी होने के बाद भी न्यायाधीशों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अदालत ने स्पष्ट किया कि इस घटना का न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश:

  1. सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम: चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया गया है कि वह उन सभी स्थानों पर पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात करे जहां न्यायिक अधिकारी SIR (Special Investigation Report) मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।

  2. ठहरने के स्थान पर सुरक्षा: जजों के होटलों और गेस्ट हाउसों पर तत्काल सुरक्षा बढ़ाई जाए।

  3. भीड़ पर नियंत्रण: मुख्य सचिव और DGP यह सुनिश्चित करें कि सुनवाई परिसर में एक समय में 5 से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश न मिले।

  4. अधिकारियों की पेशी: मालदा के कलेक्टर, DM और SSP को 6 अप्रैल 2026 को वर्चुअली अदालत के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।

चुनाव आयोग को निर्देश न्यायालय ने चुनाव आयोग को सलाह दी है कि वह राज्य प्रशासन के साथ समन्वय बिठाकर यह सुनिश्चित करे कि न्यायिक प्रक्रिया बिना किसी डर के सुचारू रूप से चल सके। कोर्ट ने आयोग को आवश्यक बल तैनात करने की पूरी छूट दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी।

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