गुमला. चाईबासा में एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाए जाने के मामले के बाद मचे बवाल और ब्लड बैंक सील होने का सीधा असर अब गुमला के सरकारी अस्पताल पर पड़ने लगा है. नियमों की सख्ती और आपूर्ति बाधित होने के कारण गुमला सदर अस्पताल में रक्त का भारी अकाल पड़ गया है. स्थिति यह है कि ब्लड बैंक के डिस्प्ले बोर्ड पर अक्सर ‘शून्य’ यूनिट का आंकड़ा चमकता रहता है, जो मरीजों के लिए डरावना सपना बन गया है.
मरीजों की व्यथा: डोनर पास है, पर सिस्टम फेल
अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने सिस्टम की बदहाली पर गहरा दुख व्यक्त किया है:
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विशेश्वर सिंह (घाघरा): कमर के नीचे के हिस्से में लकवा मार जाने के कारण उन्हें खून की सख्त जरूरत है. डोनर पास होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन खून उपलब्ध नहीं करा पा रहा है.
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मंगन लोहरा (बसिया): 55 वर्षीय मंगन के शरीर में खून नहीं बन रहा है. उनके बेटे को मजबूरन रांची जाकर एक यूनिट खून लाना पड़ा. गरीबी के कारण बार-बार रांची जाना उनके लिए संभव नहीं है.
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दिगंबर प्रधान (रायडीह): 31 मार्च से भर्ती दिगंबर के परिजनों ने बताया कि डोनर ढूँढने के बावजूद व्यवस्था ठीक नहीं होने से खून मिलने में देरी हो रही है.
डीसी का ‘महादान’ अभियान: 11 अप्रैल से लगेंगे शिविर
रक्त की इस किल्लत को देखते हुए गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने जिले भर में व्यापक रक्तदान शिविर लगाने का निर्णय लिया है. प्रशासन का लक्ष्य स्टॉक को दोबारा भरकर मरीजों की जान बचाना है.
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अभियान की शुरुआत: 11 अप्रैल को डुमरी प्रखंड से शिविर की शुरुआत होगी.
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शेड्यूल: 13 अप्रैल को जारी, 16 अप्रैल को सदर गुमला, 18 अप्रैल को पालकोट और इसी तरह 6 मई तक घाघरा और रायडीह सहित सभी प्रखंडों में शिविर आयोजित किए जाएंगे.
