गुमला. झारखंड के गुमला जिले का पालकोट प्रखंड, जिसे पौराणिक काल में पंपापुर के नाम से जाना जाता था, आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है. मान्यता है कि माता सीता की खोज में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान यहाँ पधारे थे. यहाँ सुग्रीव गुफा, शबरी आश्रम और पंपापुर सरोवर जैसे रामायण कालीन साक्ष्य आज भी मौजूद हैं, लेकिन वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र (Wildlife Sanctuary) में होने के कारण यहाँ विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं.
पर्यटकों को सुग्रीव गुफा तक पहुँचने के लिए जर्जर और संकीर्ण रास्तों का सामना करना पड़ता है. पहाड़ पर स्थित शीतलपुर और शबरी माता मंदिर जाने वाली सीढ़ियाँ टूट चुकी हैं और सुरक्षा के लिए रेलिंग तक नहीं है. पर्यटन विभाग का कहना है कि वाइल्ड लाइफ क्षेत्र होने के कारण वे यहाँ सीधे निर्माण नहीं कर सकते, जबकि वन विभाग भी सुविधाएं मुहैया कराने में विफल रहा है. स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और यहाँ रोपवे बनाने की मांग की है ताकि इस राज्य स्तरीय पर्यटक स्थल की गरिमा बहाल हो सके.
