चाकुलिया और धालभूमगढ़ में एयरपोर्ट अथॉरिटी का सर्वे; द्वितीय विश्व युद्ध की हवाई पट्टियों के दिन बहुरेंगे, 24 अप्रैल तक सौंपी जाएगी रिपोर्ट

झारखंड

चाकुलिया/धालभूमगढ़. पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया और धालभूमगढ़ में बंद पड़ी हवाई पट्टियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी कवायद शुरू की है. शनिवार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की एक उच्चस्तरीय टीम ने दोनों स्थानों का विस्तृत भौतिक निरीक्षण किया. इस दौरान अंचल अधिकारी नवीन पुरती भी मौजूद रहे. टीम ने करीब 515 एकड़ में फैली चाकुलिया हवाई पट्टी के रनवे की मजबूती, सीमाओं और वर्तमान स्थिति का बारीकी से सर्वे किया.

24 अप्रैल को तय होगा भविष्य

एएआई के अधिकारियों ने बताया कि इस संयुक्त सर्वे का मुख्य उद्देश्य हवाई पट्टियों की सुरक्षा और तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) की जांच करना है.

  • विस्तृत रिपोर्ट: सर्वे के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे 24 अप्रैल 2026 तक केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा.

  • विकास का आधार: इसी रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर यह तय होगा कि चाकुलिया और धालभूमगढ़ को किस स्तर के एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा सकता है.

रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व

इन हवाई पट्टियों का निर्माण द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन ने रणनीतिक उद्देश्यों के लिए किया था. आजादी के बाद लंबे समय तक इनकी अनदेखी की गई, जबकि पूर्व में इन्हें ‘कार्गो’ और ‘इंटरनेशनल’ एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव भी आए थे.

  • कनेक्टिविटी: विशेषज्ञों के अनुसार, इन हवाई पट्टियों के सक्रिय होने से झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती जिलों को भी बड़ा आर्थिक और यातायात लाभ मिलेगा. केंद्र सरकार का फिलहाल पूरा फोकस रनवे की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य की लैंडिंग को सुरक्षित बनाने पर है.

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