गढ़वा. जिले के डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की हालत इन दिनों बदहाल है. प्रखंड की करीब 80 हजार की आबादी और 28 गांवों की सेहत का जिम्मा उठाने वाले इस अस्पताल में दोपहर 3 बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है. सूरज ढलते ही अस्पताल परिसर वीरान हो जाता है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हो रहा है.
3 बजे के बाद मरीज लाचार, झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा
अस्पताल में ओपीडी की सुविधा सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक ही सीमित है. इसके बाद अगर किसी की तबीयत बिगड़ती है या कोई सड़क दुर्घटना होती है, तो डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते.
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मजबूरी: ग्रामीणों को या तो निजी क्लीनिकों की भारी फीस चुकानी पड़ती है या फिर मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है.
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आर्थिक बोझ: गरीब तबके के मरीजों के लिए रात के समय इलाज कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है.
मौजूदा ड्यूटी रोस्टर की स्थिति
अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती तो है, लेकिन वे केवल निर्धारित समय तक ही सीमित हैं:
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डॉ. मनोज कुमार दास: सोम, बुध, शुक्र, शनि.
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डॉ. प्रतिमा कुमारी: मंगल, गुरु.
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डॉ. कुमुद रंजन (आयुष): प्रतिदिन. ये सभी चिकित्सक 3 बजे के बाद उपलब्ध नहीं रहते, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल रही है.
जल्द बदलेगा रोस्टर: प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वीरेंद्र राम ने कहा कि वे इस समस्या से अवगत हैं. उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगले दो दिनों के भीतर नया रोस्टर तैयार किया जाएगा, जिससे 3 बजे के बाद भी डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकेगी.
ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि डंडई सीएचसी में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं बहाल होंगी, ताकि रात में होने वाली आपातकालीन स्थितियों और प्रसव पीड़ा जैसे मामलों में मरीजों को जिला अस्पताल की लंबी दूरी तय न करनी पड़े.
