कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में राज्य की जनता ने वह कर दिखाया है, जो भारतीय चुनावी इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है। गुरुवार (23 अप्रैल 2026) को 16 जिलों की 152 सीटों पर हुए मतदान ने पुराने सभी कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं। निर्वाचन आयोग के शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में 91.68% ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया है।
2021 और 2011 का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा:
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पिछला चुनाव: 2021 में राज्य में 81.56% मतदान हुआ था। इस बार इसमें 10.12% का भारी उछाल आया है।
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ऐतिहासिक तुलना: 2011 में जब 34 साल पुराने वामपंथ का किला ढहा था, तब 84.33% वोटिंग हुई थी। 2026 के आंकड़ों ने उस ‘परिवर्तन वर्ष’ को भी पीछे छोड़ दिया है।
प्रमुख जिलों का वोटिंग प्रतिशत (शाम 5 बजे तक):
| जिला | वोट प्रतिशत | जिला | वोट प्रतिशत |
| दक्षिण दिनाजपुर | 93.12% | कूचबिहार | 92.07% |
| बीरभूम | 91.55% | मुर्शिदाबाद | 91.36% |
| जलपाईगुड़ी | 91.20% | पश्चिम मेदिनीपुर | 90.70% |
| झारग्राम | 90.53% | बांकुड़ा | 89.91% |
वोटिंग पैटर्न और राजनीतिक मायने:
इतिहास गवाह है कि जब भी बंगाल में मतदान के प्रतिशत में 8% से अधिक का इजाफा हुआ है, वह सत्ता के ‘महा-परिवर्तन’ का संकेत रहा है। 1977 और 2011 इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इतनी भारी संख्या में मतदाताओं का बूथों तक पहुंचना किसी बड़े मुद्दे पर जनता के ध्रुवीकरण की ओर इशारा कर रहा है।
असम और केरलम को भी पीछे छोड़ा:
9 अप्रैल को संपन्न हुए अन्य राज्यों के चुनावों की तुलना में भी बंगाल अव्वल रहा है:
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बंगाल: 91.68%
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असम: 85.91%
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केरलम: 78.27%
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पुडुचेरी: 89.87%
अब 29 अप्रैल की बारी:
पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी नजरें 29 अप्रैल (बुधवार) को होने वाले दूसरे और अंतिम चरण पर हैं। इस दिन बाकी बची 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। राज्य की सभी 294 सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जिससे यह साफ होगा कि ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी या बंगाल में भगवा लहराएगा।
