धनबाद. कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में ट्रेड यूनियनों की मान्यता और उनके प्रतिनिधित्व के दशकों पुराने ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है. 8 मई 2026 को औद्योगिक संबंध संहिता (IR Code), 2020 के केंद्रीय नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद कंपनी और यूनियन गलियारों में हलचल तेज हो गई है. कोल इंडिया प्रबंधन की उच्चस्तरीय कमेटी ने नए नियमों को लागू करने की सिफारिशें सौंप दी हैं.
मान्यता का नया गणित: वोट की चोट
अब तक यूनियनों की ताकत के दावे कागजों और सदस्यता शुल्कों (चेक-ऑफ) पर आधारित होते थे, लेकिन अब सब कुछ ‘सीक्रेट बैलेट’ (गुप्त मतदान) से तय होगा:
-
एकमात्र वार्ताकार: यदि किसी यूनियन को 51% या अधिक वोट मिलते हैं, तो वही प्रबंधन के साथ वार्ता के लिए अधिकृत होगी.
-
वार्ताकार परिषद: यदि किसी को भी 51% वोट नहीं मिलते, तो 20% या अधिक वोट पाने वाली यूनियनों को मिलाकर एक ‘वार्ताकार परिषद’ (Negotiating Council) बनाई जाएगी.
-
बाहर होने का खतरा: 20% से कम वोट पाने वाली यूनियनों की मान्यता 5 वर्षों के लिए समाप्त हो जाएगी.
-
पहुंच की शर्त: कोल इंडिया (CIL) मुख्यालय स्तर पर जगह बनाने के लिए किसी यूनियन को कम से कम 5 सहायक कंपनियों (Subsidiaries) में 20% वोट हासिल करना अनिवार्य होगा.
90 दिनों का ‘चुनाव कैलेंडर’
अधिसूचना के बाद चुनाव की प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी:
-
पहले दिन: कट-ऑफ डेट और मतदाताओं का निर्धारण.
-
दिन 71-75: सीक्रेट बैलेट के जरिए वोटिंग.
-
दिन 76-80: मतगणना और परिणामों की घोषणा.
-
दिन 82-89: प्रोजेक्ट से लेकर CIL मुख्यालय स्तर तक मान्यता के आदेश जारी होना.
चार-स्तरीय वार्ता प्रणाली
नई व्यवस्था के तहत बातचीत का दायरा स्पष्ट रूप से बंटा होगा:
-
मुख्यालय स्तर: वेतन समझौता, ट्रांसफर पॉलिसी और स्टैंडिंग ऑर्डर.
-
सब्सिडियरी स्तर: कंपनी-विशिष्ट मुद्दे.
-
एरिया और प्रोजेक्ट स्तर: स्थानीय कार्यस्थल और संचालन संबंधी समस्याएं.
महिलाओं की भागीदारी अब अनिवार्य
नए कानून के तहत वर्क्स कमेटी और शिकायत निवारण कमेटी में महिलाओं को अनुपातिक प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य होगा. वर्तमान में कोल इंडिया में 19,135 महिला कर्मचारी हैं, जिनकी समितियों में भागीदारी अब औपचारिक न रहकर कानूनी आवश्यकता होगी.
यूनियन राजनीति पर असर
21 नवंबर 2025 से प्रभावी इस कोड के लागू होने से यूनियन राजनीति में स्थिरता आएगी. अब 5 साल के लिए एक निश्चित और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई प्रतिनिधि संस्था होगी, जिससे वेतन समझौतों और नीतिगत निर्णयों में स्पष्टता रहेगी. फिलहाल प्रबंधन और यूनियनों के बीच इस पर जल्द रणनीतिक बैठक होने की उम्मीद है.
