कोलकाता. उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी अवैध निर्माणों के खिलाफ “बुलडोजर कार्रवाई” शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद तिलजला इलाके में अवैध रूप से बनी इमारतों को गिराने का अभियान छेड़ दिया गया है. भाजपा सरकार के इस कड़े रुख से अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है.
हादसे के बाद जागा प्रशासन
यह कार्रवाई मंगलवार को तिलजला स्थित एक चमड़ा कारखाने में लगी भीषण आग के बाद शुरू हुई है.
-
दो मौतें: कारखाने के स्टोर रूम में लगी आग और धुएं के कारण दो श्रमिकों की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे.
-
जांच रिपोर्ट का खुलासा: घटना के बाद गठित चार सदस्यीय टीम ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें खुलासा हुआ कि इमारत पूरी तरह अवैध थी और बिना किसी बिल्डिंग प्लान के बनाई गई थी. इसमें फायर सेफ्टी के बुनियादी इंतजाम भी नहीं थे.
छावनी में तब्दील हुआ तिलजला
मुख्यमंत्री द्वारा अवैध इमारतों को 24 घंटे के भीतर गिराने के निर्देश के बाद केएमसी (KMC) और केएमडीए (KMDA) ने संयुक्त अभियान शुरू किया:
-
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कोलकाता पुलिस की रैपिड एक्शन फोर्स (रैफ) और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.
-
विरोध पर सख्ती: कार्रवाई रोकने पहुंचे कुछ स्थानीय लोगों को पुलिस ने बल प्रयोग कर मौके से हटा दिया और पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई है.
खास बिंदु
-
तिलजला के जीजे खान रोड पर अवैध हिस्सों को तोड़ने का काम जारी.
-
मुख्यमंत्री ने राज्य भर में अवैध निर्माण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने की घोषणा की है.
-
अग्निकांड में लापरवाही बरतने वालों और अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वालों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है.
भाजपा सरकार की इस कार्रवाई को कोलकाता में अवैध रियल एस्टेट और अनधिकृत कारखानों के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत माना जा रहा है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाली किसी भी अवैध इमारत को बख्शा नहीं जाएगा.
