धनबाद. झारखंड के धनबाद जिले के ग्रामीण और सुदूर इलाकों में मिट्टी व टिन के कच्चे और जर्जर मकानों में गुजर-बसर करने वाले अत्यंत गरीब परिवारों के लिए राहत भरी खबर है. सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवास योजना’ के तहत जिले में पक्के मकान बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. सूबे की सरकार ने धनबाद जिले के सभी प्रखंडों में नए आवासों के निर्माण के लिए राशि (फंड) का आवंटन जारी कर दिया है. इस योजना के जरिए चयनित बेहद जरूरतमंद लाभुकों को सीधे आर्थिक सहायता देकर सम्मानजनक पक्का घर उपलब्ध कराने की प्रशासनिक पहल तेज हो गई है.
सभी 10 प्रखंडों के 100 परिवारों को मिलेगी ₹2-2 लाख की आर्थिक मदद
जिला प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कल्याणकारी योजना को धनबाद जिले के सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू किया जा रहा है:
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प्रखंड स्तर पर चयन: धनबाद के सभी 10 प्रखंडों में सर्वे के आधार पर अत्यंत गरीब और बेघर परिवारों को चिन्हित किया गया है.
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100 परिवारों को सीधा लाभ: प्रत्येक प्रखंड से शुरुआती चरण में 10-10 योग्य लाभुकों का चयन किया गया है. इस प्रकार पूरे धनबाद जिले में कुल 100 परिवारों को योजना का सीधा लाभ मिलेगा.
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₹2 लाख की सहायता: योजना के तहत प्रत्येक चयनित लाभुक परिवार को अपना पक्का मकान खड़ा करने के लिए सरकार की ओर से करीब ₹2 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी.
वंचित, अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्राथमिकता
इस योजना का मुख्य फोकस समाज के उस अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना है, जिसके पास रहने को सुरक्षित छत नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), समाज के वंचित और अत्यंत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को इस सूची में प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है.
बरसात में ढहते आशियानों के दर्द से मिलेगी मुक्ति
जमीनी हकीकत पर गौर करें तो धनबाद के कोयलांचल और ग्रामीण इलाकों में आज भी एक बड़ी आबादी जर्जर मिट्टी के घरों और टिन शेड के नीचे रहने को मजबूर है.
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मॉनसून की आफत: हर साल बरसात के दिनों में इन परिवारों की मुसीबतें चरम पर पहुंच जाती हैं. छतें टपकने और दीवारें सीलन से कमजोर होने के कारण कई घर जमींदोज हो जाते हैं.
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प्रशासनिक लाचारी पर रोक: अक्सर देखा गया है कि मॉनसून में घर ढहने के बाद जब पीड़ित परिवार प्रखंड कार्यालय (ब्लॉक) के चक्कर काटते हैं, तब तक सरकारी बजट या आवंटन समाप्त हो चुका होता है. इस बार मानसून से पहले राशि का आना इन परिवारों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा.
पारदर्शिता के लिए ‘डीबीटी’ का सहारा, निर्माण कार्य की होगी सख्त निगरानी
योजना में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार और बिचौलियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े नियम बनाए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, लाभुकों के चयन में पूरी पारदर्शिता बरती गई है और स्वीकृत राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से किस्तों में ट्रांसफर की जाएगी.
इसके अलावा, मकान निर्माण की भौतिक प्रगति की समय-समय पर जियो-टैगिंग और प्रशासनिक निगरानी की जाएगी, ताकि दी गई राशि का सही उपयोग हो और बनने वाले मकानों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो. प्रशासन का लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर सभी 100 आवासों का निर्माण पूरा कराने का है.
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