पश्चिमी सिंहभूम. पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत मध्य विद्यालय नोवामुंडी बाजार के समीप शनिवार को एक बड़ा हादसा सामने आया. यहाँ एक जंगली बंदर बिजली के चालू (हाई वोल्टेज) तार की चपेट में आने से बुरी तरह झुलसकर गंभीर रूप से घायल हो गया. करंट लगते ही बंदर अचेत होकर सीधे ऊंचाई से नीचे जमीन पर गिर पड़ा, जिससे बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई.
बरगद के पेड़ से छलांग लगाने के दौरान हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय दुकानदारों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार दोपहर की है:
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असंतुलित होकर टकराया: जंगली बंदर बाजार के पास स्थित एक विशाल बरगद के पेड़ से छलांग लगाकर पास के ही दूसरे पेड़ पर जाने का प्रयास कर रहा था.
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करंट का झटका: इसी दौरान हवा में ही उसका संतुलन थोड़ा बिगड़ा और वह सीधे बिजली के खंभे (पोल) से गुजर रहे नंगे तारों से टकरा गया. जोरदार करंट लगते ही वह तड़पकर नीचे आ गिरा.
भीड़ ने दिखाई संवेदनशीलता, वन विभाग की टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
बंदर को तड़पता देख मौके पर स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों की भारी भीड़ जमा हो गई.
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मीडिया और विभाग को सूचना: स्थानीय सजग नागरिकों ने तुरंत इस दुर्घटना की जानकारी मीडिया प्रतिनिधि को दी. सूचना मिलते ही प्रतिनिधि ने बिना वक्त गंवाए सीधे वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों को मामले से अवगत कराया.
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फर्स्ट एड और रेस्क्यू: सूचना पाकर वन विभाग की एक रेस्क्यू टीम त्वरित कार्रवाई करते हुए पिंजरे और जरूरी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची. टीम ने घायल बंदर को सुरक्षित ढंग से अपने कब्जे में लिया और उसे विभागीय वाहन से फॉरेस्ट ऑफिस (वन कार्यालय) ले गई, जहां पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसका सघन उपचार और मरहम-पट्टी शुरू कर दी गई है.
अंधाधुंध खनन और सिमटते जंगलों से आबादी क्षेत्र में आ रहे वन्यजीव
इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि नोवामुंडी और आस-पास के इलाकों में बड़े पैमाने पर चल रही लौह अयस्क खनन (Mining Activities) और जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह नष्ट हो रहा है.
जंगलों के सिमटने से बंदर, हाथी, हिरण और भालू जैसे वन्यजीवों के सामने भोजन और पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. यही मुख्य वजह है कि ये मूक पशु जंगलों को छोड़कर रिहायशी इलाकों, गांवों और व्यस्त बाजारों का रुख करने को मजबूर हैं, जहां वे अक्सर ऐसी बिजली जनित दुर्घटनाओं या तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से सुदूर क्षेत्रों में पौधारोपण करने और जंगली जानवरों के लिए प्राकृतिक भोजन-पानी की व्यवस्था जंगल के भीतर ही सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है.
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