धनबाद. भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और 1 करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात माओवादी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के पीछे सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की दो महीने की गुप्त और सघन रणनीति काम कर रही थी. करीब दो महीने पहले सारंडा और कोल्हान के जंगलों में 3000 जवानों की घेराबंदी को तोड़कर मिसिर बेसरा अपने तीन-चार साथियों के साथ भाग निकला था. इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए बेहद चालाकी से समानांतर (Parallel) सीक्रेट ऑपरेशन चलाया.
पुलिस ने सारंडा-कोल्हान इलाके में अपना तलाशी अभियान जारी रखा ताकि माओवादियों को लगे कि पुलिस अभी भी वहीं भटक रही है, जबकि दूसरी ओर गिरिडीह-धनबाद सीमा पर बेहद गुपचुप तरीके से जाल बिछाया गया.
नाकेबंदी और मिनी वैन की चेकिंग: ऐसे हत्थे चढ़ा 1 करोड़ का इनामी
28 जुलाई की शाम पुलिस को सटीक इनपुट मिला कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ गिरिडीह की ओर जा रहा है:
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नाकेबंदी और घेराबंदी: ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब के नेतृत्व में दो टीमों ने शाम 6:15 बजे बेंहाचिया श्मशान घाट के पास वाहनों की सघन जांच शुरू की.
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भागने की कोशिश हुई नाकाम: रात करीब 8:10 बजे चिरकुंडा की तरफ से आ रही एक मिनी वैन को जब पुलिस ने रोका, तो चालक ने गाड़ी भगाने का प्रयास किया. हालांकि, मुस्तैद जवानों ने वैन को चारों तरफ से घेर लिया.
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शरीर से बंधी थीं एके-47 राइफलें: वैन में सवार पांचों लोगों ने चादर ओढ़ रखी थी. तलाशी लेने पर बीच की सीट पर बैठे तीन लोगों के शरीर से एके-47 (AK-47) राइफलें बंधी मिलीं. इससे पहले कि वे हथियार संभालते, जवानों ने पांचों को गिरफ्तार कर लिया.
फोन से दूरी और पारसनाथ के गांवों में ठिकाना: ऐसे बच रहा था मिसिर
मिसिर बेसरा पुलिस और सर्विलांस (Surveillance) से बचने के लिए बेहद सतर्कता बरत रहा था:
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मोबाइल का नो-यूज: वह न तो खुद मोबाइल रखता था और न ही दूसरों के फोन से बातचीत करता था.
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हर 2 दिन में बदलता था ठिकाना: सारंडा से भागने के बाद उसने पारसनाथ के नक्सल प्रभावित गांवों में शरण ली. उसने कभी रिश्तेदारों के घर में पनाह नहीं ली, बल्कि पुराने नक्सली प्रशांत बोस के समय आंदोलन से लाभान्वित हुए आम ग्रामीणों के घरों को चुना.
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सरेंडर का दबाव ठुकराया: सुरक्षा एजेंसियां लगातार उस पर आत्मसमर्पण (Surrender) का दबाव बना रही थीं, लेकिन उसने हर प्रस्ताव ठुकरा दिया.
बॉडीगार्ड के सरेंडर के बाद मिला ‘पिन-पॉइंटेड’ इनपुट
ऑपरेशन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तीन दिन पहले आया, जब मिसिर बेसरा का मुख्य बॉडीगार्ड पुलिस के हत्थे चढ़ गया और उसने सरेंडर कर दिया. उसकी निशानदेही और जुटाए गए नए खुफिया इनपुट्स के आधार पर सुरक्षा बलों ने धनबाद के बरवड्डा जंगल क्षेत्र के समीप किराए की गाड़ी से गुजर रहे मिसिर बेसरा और उसके साथियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया.
