रांची. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित माध्यमिक आचार्य (PGT) पद पर नियुक्ति परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यताओं पर बड़े सवाल उठने लगे हैं. जेएसएससी द्वारा अनुशंसित कुल 377 सफल अभ्यर्थियों में से 244 अभ्यर्थी निजी (Private) विश्वविद्यालयों से पढ़े हैं, जिनमें से करीब 28 फीसदी (108 अभ्यर्थी) ने राज्य के ही दो निजी विश्वविद्यालयों से स्नातकोत्तर (PG) की डिग्री हासिल की है.
स्नातक और पीजी के बीच 5 से 8 वर्षों का अंतर
पड़ताल में सामने आया है कि मामला सिर्फ निजी विवि से पढ़ाई करने तक सीमित नहीं है:
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लंबा गैप: करीब 100 सफल अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने ग्रेजुएशन (Graduation) पूरा करने के 5 से 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अचानक पीजी में दाखिला लिया और उत्तीर्ण हुए.
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नियुक्ति वर्ष में डिग्री: कई अभ्यर्थियों ने वर्ष 2022-24 और 2023-25 के सत्र में पीजी की पढ़ाई पूरी की, जबकि 2025 में नियुक्ति का विज्ञापन निकाला गया था. यानी परीक्षा से ठीक पहले हासिल की गई डिग्रियों की वैधता संदेह के घेरे में है.
अंकों में एकरूपता और विषयवार गड़बड़ी के आरोप
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अंकों में अजीब समानता: निजी विश्वविद्यालयों से पास अधिकांश अभ्यर्थियों के अंक 65% से 68% के बीच हैं. इस तरह की एकरूपता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
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खोरठा विषय में एक ही यूनिवर्सिटी का दबदबा: खोरठा विषय में सफल 9 अभ्यर्थी एक ही निजी विश्वविद्यालय से हैं, जिनमें से शीर्ष 7 टॉपर अभ्यर्थियों ने उसी विवि से पीजी किया है.
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विशिष्ट विषय: राजनीति शास्त्र (33 अभ्यर्थी), समाजशास्त्र (22 अभ्यर्थी) और गृह विज्ञान (14 अभ्यर्थी) में निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों की सफलता दर सबसे अधिक दर्ज की गई है.
इन प्रमुख बिंदुओं पर हो सकती है जांच
उठ रहे सवालों के बाद अब निम्नलिखित शैक्षणिक बिंदुओं पर जांच की मांग जोर पकड़ रही है:
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अभ्यर्थियों के नामांकन फॉर्म, प्रवेश की तारीख और उपयोग किए गए स्नातक प्रमाणपत्र.
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हर सेमेस्टर/वर्ष की परीक्षा तिथि, उपस्थिति (Attendance) रिकॉर्ड और आंतरिक मूल्यांकन का मिलान.
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विश्वविद्यालय के मूल रजिस्टर (TR) में दर्ज अंकों का जारी मार्कशीट से सत्यापन.
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संबंधित सत्र (Academic Session) में विश्वविद्यालय की UGC/AICTE से मान्यता की स्थिति.
