गिरिडीह। नगर निकाय चुनाव ईवीएम की जगह वैलेट पेपर से कराने के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की मंशा पर उंगली उठाया है। शुक्रवार को गिरिडीह में पत्रकारों से बात करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वैलेट पेपर की जगह ईवीएम से चुनाव ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग होता है, बावजूद इसके राज्य सरकार द्वारा वैलेट पेपर से निकाय चुनाव कराने का फैसला लेना सरकार की मंशा को जाहिर करता है। कहा पहले तो राज्य सरकार चुनाव कराने से ही डरती रही। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद चुनाव की घोषणा की गई तो दलगत आधार पर नहीं की गई। ऐसे में सरकार की नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की है केंद्रीय गृह मंत्रालय से वार्ता कर झारखंड के 48 निकाय क्षेत्रों के हर बूथों पर पारा मिलिट्री फोर्स की तैनाती करे ताकि मतदाता निर्भीक हो कर अपना मताधिकार का प्रयोग कर सकें और चुनाव निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो।
निकाय चुनाव को लेकर बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य की हेमंत सरकार निकाय चुनाव कराने से डरती रही।भाजपा ने चुनाव की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। यहां तक कि भाजपा से जुड़े वार्ड पार्षद उच्च न्यायालय तक पहुंचे और जब उच्च न्यायालय का दबाव बना तो सरकार बैकफुट पर आई और चुनाव की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि इस चुनाव को लेकर राज्य सरकार की मंशा शुरू से ठीक नहीं है। चुनाव निष्पक्ष हो इस बात को लेकर उन्हें झारखंड सरकार की पुलिस पर भरोसा नहीं है। इस लिए राज्य निर्वाचन आयोग वह चुनाव के दौरान हर बूथों पर वह केंद्रीय पारा मिलीट्री फोर्स को तैनात करने की मांग करते हैं।
संगठन से बागियों की करवाई के सवाल पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अभी समय है। संगठन के अंदर कोई फुट नहीं है, चुनाव लड़ने की इक्षा रखने वाले मैदान में अगर हैं तो उन्हें अंत समय तक समझा लिया जाएगा। भाजपा नेता नागेश्वर दास के आरोप को लेकर बाबूलाल ने कहा लोग कभी कभी गुस्से में आकर बहुत कुछ बोल जाते हैं, सब ठीक हो जाएगा।
