राँची. झारखंड में रामनवमी के त्योहार से पहले डीजे बजाने को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है. हजारीबाग के भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने बुधवार 11 मार्च को विधानसभा परिसर में बैनर-पोस्टर के साथ प्रदर्शन कर जुलूसों में डीजे बजाने की अनुमति देने की मांग उठाई. उन्होंने प्रशासन द्वारा मंगला जुलूस में डीजे जब्त करने और आगामी रामनवमी पर रोक लगाने के निर्णय को धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध बताया. हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि झारखंड में डीजे पर यह प्रतिबंध राज्य सरकार ने नहीं, बल्कि झारखंड हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद लागू किया गया है.
झारखंड में डीजे बजाने को लेकर हाईकोर्ट ने 16 जुलाई 2024 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे पूरी तरह ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ माना था. मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने स्पष्ट किया था कि डीजे का शोर बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों के लिए जानलेवा है, इसलिए किसी भी जुलूस या समारोह में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती. नियमों के मुताबिक, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर पूर्ण प्रतिबंध है और दिन के समय भी आवासीय क्षेत्रों के लिए ध्वनि सीमा निर्धारित है.
दिलचस्प पहलू यह भी है कि जहां झारखंड में इस पर विवाद हो रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे कई भाजपा शासित राज्यों में भी ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत डीजे के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं. वर्तमान नियमों के अनुसार, सार्वजनिक स्थलों पर ध्वनि यंत्रों के उपयोग के लिए स्थानीय थाना और एसडीओ (SDO) से अनुमति लेना अनिवार्य है, और नियमों का उल्लंघन करने पर डीजे जब्त करने के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का भी प्रावधान है.
