गिरिडीह. नगर निगम को दो वर्गों में बांटने को चुनौती देने वाली याचिका को झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने शांतनु कुमार चंद्र की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। दरअसल याचिकाकर्ता शांतनु कुमार चंद्र ने सरकार की उस नीति को चुनौती दी थी, जिसमें जनसंख्या के आधार पर धनबाद में मेयर का पद अनारक्षित और गिरिडीह में शेड्यूल कास्ट के लिए आरक्षित किया गया था। प्रार्थी का कहना है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, धनबाद में शेड्यूल कास्ट की आबादी करीब 2 लाख है, इसलिए मेयर का पद शेड्यूल कास्ट के लिए आरक्षित होना चाहिए था। लेकिन सरकार की नीति के तहत यहां मेयर का पद अनारक्षित कर दिया गया। वहीं गिरिडीह में शेड्यूल कास्ट की आबादी केवल 30 हजार है, लेकिन वहां मेयर का पद आरक्षित कर दिया गया। प्रार्थी ने सरकार की नीति को संविधान के खिलाफ बताया है। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्क्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा।
Byte : धीरज कुमार अधिवक्ता, झारखंड हाईकोर्ट
