पटना. बिहार की राजनीति में एक युग के अंत और नए अध्याय की शुरुआत का ‘काउंटडाउन’ शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद अब उनके विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देने की खबरें तेज हैं. माना जा रहा है कि अगले 72 घंटों के भीतर नीतीश कुमार परिषद की सदस्यता छोड़ देंगे, जो उनके बिहार की सक्रिय राजनीति से केंद्र की ओर रुख करने का अंतिम चरण होगा. इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच सबसे चौंकाने वाली तस्वीर उनके बेटे निशांत कुमार की बढ़ी हुई सक्रियता है.
राजनीति से दशकों तक दूर रहने वाले निशांत कुमार अब जनता दल (यूनाइटेड) की कमान संभालते नजर आ रहे हैं. शुक्रवार को निशांत कुमार ने पटना स्थित जदयू कार्यालय पहुंचकर न केवल वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, बल्कि ग्राउंड लेवल के कार्यकर्ताओं के साथ लंबी बातचीत भी की. उन्होंने मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए के बड़े नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की भी योजना बनाई है.
अगले 72 घंटे और निशांत की रणनीति:
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संगठन पर पकड़: निशांत कुमार ने जदयू दफ्तर में संजय गांधी और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा जैसे कद्दावर नेताओं के साथ बैठक की. उमेश कुशवाहा ने उन्हें पार्टी के विभिन्न जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं से रूबरू कराया.
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पावर ट्रांसफर का संकेत: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार अपनी विरासत सुरक्षित करने के लिए निशांत को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं. हालांकि, सत्ता का मुख्य केंद्र अब भाजपा के पाले में जाने की संभावना है.
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भाजपा का अगला कदम: नीतीश कुमार के हटने के बाद बिहार को अपना पहला भाजपा मुख्यमंत्री मिल सकता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सम्राट चौधरी या कोई अन्य पिछड़ा वर्ग (EBC) नेता इस पद की रेस में सबसे आगे है.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार फिलहाल कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और ‘पावर ट्रांसफर’ के दौरान पार्टी में किसी भी प्रकार की टूट को रोकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. 20 वर्षों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस फैसले ने पूरे देश की नजरें पटना पर टिका दी हैं.
