रांची. झारखंड में रसोई गैस की किल्लत के बीच अब जीवन रक्षक ‘रक्त’ का गंभीर संकट पैदा हो गया है. सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) और सदर अस्पताल सहित राजधानी के अधिकांश ब्लड बैंक खाली होने की कगार पर हैं. स्थिति इतनी विकट है कि हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद मरीजों के परिजनों को ‘रिप्लेसमेंट डोनेशन’ (खून के बदले खून) के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. वर्तमान में रिम्स में भर्ती मरीजों को उसी ग्रुप का डोनर लाने पर ही खून उपलब्ध कराया जा रहा है.
हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी: झारखंड हाईकोर्ट ने 18 दिसंबर 2025 को स्पष्ट आदेश दिया था कि किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में रिप्लेसमेंट डोनेशन नहीं कराया जाएगा. इसके बावजूद, रिम्स में भर्ती छोटू उरांव और निजी अस्पताल में भर्ती शाहिद अंसारी जैसे दर्जनों मरीजों के परिजनों को खून के लिए डोनर का इंतजाम करना पड़ा. स्वास्थ्य विभाग के दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि स्वैच्छिक रक्तदान में भारी कमी आई है.
रांची के प्रमुख अस्पतालों में ब्लड स्टॉक की स्थिति:
| अस्पताल | पॉजिटिव (A | B | O | AB) | निगेटिव स्टॉक | | :— | :— | :— | :— | | रिम्स (RIMS) | A-20, B-22, O-30, AB-7 | केवल A निगेटिव (4 यूनिट) | | सदर अस्पताल | A-2, B-3, O-3, AB-1 | शून्य | | पारस हॉस्पिटल | A-4, B-5, O-8, AB-2 | शून्य | | देवकमल/CCL | सभी शून्य | शून्य | | सेवा सदन | A-39, B-62, O-42, AB-18 | B-1, O-1 |
निजी अस्पतालों का बढ़ता दबाव: रिम्स ब्लड बैंक पर न केवल अपने मरीजों का बोझ है, बल्कि शहर के निजी अस्पतालों से भी परिजन मांगपत्र लेकर पहुंच रहे हैं. कई बड़े अस्पतालों जैसे देवकमल, सीसीएल और गुरु नानक अस्पताल में स्टॉक पूरी तरह शून्य हो गया है. झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के निदेशक छवि रंजन ने कहा है कि 90% आपूर्ति स्वैच्छिक रक्तदान से होनी चाहिए और यदि रिप्लेसमेंट के लिए दबाव बनाया जा रहा है, तो इसकी जांच की जाएगी.
ब्लड बैंकों की इस खाली स्थिति ने उन मरीजों की जान जोखिम में डाल दी है जिनका ऑपरेशन होना है या जिन्हें इमरजेंसी में खून की जरूरत है. सामाजिक संस्थाओं ने युवाओं से अपील की है कि वे आगे आएं और इस संकट को दूर करने के लिए रक्तदान करें.
