चतरा. झारखंड के चतरा जिले का सदर थाना क्षेत्र इन दिनों अपराध की गिरफ्त में है. पिछले महज एक महीने के भीतर हत्या की चार बड़ी वारदातों ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है. आलम यह है कि लोग शाम ढलते ही घरों से निकलने में कतरा रहे हैं. इन घटनाओं में पुलिस की सुस्ती और केवल एक मामले के आंशिक खुलासे ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कब-कब लहूलुहान हुआ चतरा? (वारदातों का ब्योरा)
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7 मार्च: जयशंकर नगर सजना गांव निवासी अनिश कुमार सिंह (28) का शव बीआरसी कार्यालय के पास मिला. अनिश पांच दिनों से लापता थे. एक महीना बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं.
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13 मार्च: हजारीबाग के करमजीत कुमार उर्फ विकास कुमार की जवाहर नवोदय विद्यालय के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने 12 घंटे में साजिशकर्ता को तो दबोचा, लेकिन मुख्य शूटर आज भी फरार है.
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23 मार्च: आरूदाना जंगल में महुआ चुनने गई गीता देवी की टांगी (कुल्हाड़ी) से काटकर हत्या कर दी गई. 14 दिन बाद भी हत्यारा पुलिस की पकड़ से बाहर है.
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4 अप्रैल: गंधरिया निवासी और पशु चिकित्सालय कर्मी योगेंद्र यादव का शव तुड़ाग गांव में मिला. अपराधियों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए उनकी दोनों आंखों में तेजाब डाल दिया था. इस मामले में भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
परिजनों का फूटा गुस्सा: ‘पुलिस कर रही लापरवाही’
मृतकों के परिजनों ने जिला पुलिस प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है कि वे लगातार एसपी, एसडीपीओ और थाना प्रभारी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हो रहा. अनिश कुमार की पत्नी शीतल देवी और गीता देवी के पति शीतल यादव ने दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है.
थाना प्रभारी का पक्ष
सदर थाना प्रभारी अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस की टीम सभी मामलों की गहनता से छानबीन कर रही है. उन्होंने कहा:
“कुछ मामलों में संदिग्धों से पूछताछ जारी है. हमारी पूरी टीम मामलों का खुलासा करने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए तकनीकी और मानवीय इनपुट पर काम कर रही है.”
चतरा में बढ़ती इन आपराधिक घटनाओं ने न केवल आम नागरिक को डरा दिया है, बल्कि पुलिस के इंटेलिजेंस और गश्त पर भी उंगली उठा दी है.
