चतरा. झारखंड के चतरा शहर में घरेलू रसोई गैस की किल्लत अब चरम पर पहुंच गई है. पिछले कई दिनों से गैस की आपूर्ति ठप रहने के कारण शहर के सैकड़ों घरों में चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है. सोमवार को करीब चार दिनों के लंबे इंतजार के बाद जब बंशीधर इंडेन गैस एजेंसी का एक ट्रक गैस लेकर पहुंचा, तो उपभोक्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा. गैस लेने की होड़ में लोग सुबह 6:30 बजे से ही पुलिस लाइन के पास स्थित मैदान में खाली सिलेंडर लेकर कतारों में खड़े हो गए.
धूप में घंटों इंतजार, फिर भी कई को नहीं मिली गैस: गैस वितरण शुरू होने से पहले ही मैदान में महिलाओं, बुजुर्गों और पुरुषों की लंबी लाइन लग गई थी. सुबह 9 बजे ट्रक पहुंचने के बाद वितरण शुरू हुआ, लेकिन मांग इतनी अधिक थी कि कुछ ही घंटों में स्टॉक खत्म हो गया. भीषण धूप में घंटों खड़े रहने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को खाली सिलेंडर लेकर ही घर वापस लौटना पड़ा. उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति ने उनके बजट और दैनिक जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है.
विकल्प तलाश रहे लोग: गैस संकट के कारण चतरा के कई घरों में अब कोयले और लकड़ी के चूल्हों का दौर वापस लौट आया है. जिन परिवारों के पास बिजली की सुविधा है, वे इंडक्शन चूल्हों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ती मांग और गैस की अनिश्चितता ने गृहिणियों की परेशानी बढ़ा दी है. जमशेदपुर में जहां बिचौलिये 2800 रुपये तक में सिलेंडर बेच रहे हैं, वहीं चतरा में लोग सरकारी रेट पर भी गैस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से इस संकट में हस्तक्षेप करने और गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है. लोगों का कहना है कि यदि आपूर्ति व्यवस्था जल्द दुरुस्त नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे.
