कोयरीडीह: श्री शतचंडी महायज्ञ में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब; भक्तिमय वातावरण में परिक्रमा और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ क्षेत्र

गिरिडीह

गिरिडीह. झारखंड के गिरिडीह जिला अंतर्गत कोयरीडीह में आयोजित नौ दिवसीय श्री श्री 108 श्री शतचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन, बुधवार को भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला. महायज्ञ की परिक्रमा के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र ‘जय माता दी’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा.

भक्ति भाव के साथ की गई परिक्रमा

यज्ञशाला की परिक्रमा करने के लिए दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कोयरीडीह पहुँच रहे हैं. बुधवार सुबह से दोपहर तक यज्ञ मंडप के चारों ओर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं. वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है और लोग श्रद्धा भाव से क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं.

वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन

यज्ञशाला में यज्ञाचार्य सुबोध उपाध्याय के नेतृत्व में विद्वान पुरोहितों की टीम द्वारा वैदिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना संपन्न कराई जा रही है.

  • अनुष्ठान: मुख्य यजमानों ने सभी वेदियों की पूजा की और आहुतियां डालीं.

  • संकल्प: मंत्रोच्चार के बीच क्षेत्र की सुख, शांति और खुशहाली का संकल्प लिया गया.

4 अप्रैल से जारी है आध्यात्मिक उत्सव

कोयरीडीह में इस नौ दिवसीय महायज्ञ का शुभारंभ 4 अप्रैल को हुआ था. आयोजन के दौरान प्रतिदिन का कार्यक्रम इस प्रकार है:

  1. दिन: सुबह से शाम तक वैदिक पूजन और विशेष चंडी पाठ का आयोजन होता है.

  2. संध्या: माता रानी की भव्य संध्या आरती की जाती है.

  3. रात्रि: यज्ञाचार्य सुबोध उपाध्याय और अंतरराष्ट्रीय कथावाचक मुकुल कृष्ण जी महाराज द्वारा संगीतमय भागवत कथा का वाचन किया जाता है, जिसे सुनने के लिए रात में भी भारी भीड़ जुट रही है.

यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इस धार्मिक अनुष्ठान से आसपास के गांवों का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया है. महायज्ञ की पूर्णाहुति को लेकर भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.

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