रांची. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस की कार्यशैली और उसे मिल रहे राजनीतिक संरक्षण पर सवालिया निशान खड़ा किया है. गुरूवार को रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में सुनियोजित रूप से अपराधियों को बचाने का काम किया जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुलिस को वसूली गैंग बना दिया है. एसीबी पहले फाइल तैयार करती है और उसके बाद आरोपियों से समझौता करती है. भूमि घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एसीबी ने बड़ी तत्परता को दिखाते हुए विनय चौबे समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया लेकिन समझौते के तहत 90 दिन गुजर जाने के बाद भी चार्ज सीट दाखिल नहीं किया. एसीबी की इस लापरवाही का नतीजा हुआ कि सभी आरोपियों को बेल मिल गई। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय जब निष्पक्ष रूप से जांच करती है तब झारखंड पुलिस पूरे कार्यालय को घेर लेती है. बाबूलाल मरांडी ने झारखंड उच्च न्यायालय से मांग करते हुए कहा कि इस तरह के मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच करनी चाहि. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अंश अंशिका लापता प्रकरण में भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में पुलिस ने इस मामले में टाल मटोल का रवैया अपनाया. इस मामले में सामाजिक संगठन बजरंग दल के तीन युवाओं ने बच्चों को जब खोज निकाला तब इसका श्रेय पुलिस ने अपने महकमें को दे दिया. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उन तीन युवकों को सम्मानित करने का काम करेगी और मांग करती है कि पुलिस की ओर से घोषित इनाम की राशि तीनों युवकों को दी जाए. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में लूट और अराजकता का माहौल है। यहां कोई भी सुरक्षित नहीं है. उन्होंने कहा कि झारखंड की सुरक्षा के लिए हम सभी को जगना होगा.
