दुमका में मोदी सरकार पर बरसे हेमंत सोरेन, बोले – झारखंड में देश का 42% खनिज और बजट में नाम तक नहीं

झारखंड

झारखंड.  झारखंड मुक्ति मोर्चा के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर दुमका के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड देश को सबसे अधिक खनिज संपदा देने वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन केंद्रीय बजट में इस राज्य की लगातार अनदेखी की जा रही है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश के कुल खनिज संसाधनों का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा झारखंड से जाता है. इसके बावजूद जब केंद्रीय बजट पेश होता है, तो झारखंड का नाम तक नहीं लिया जाता. उन्होंने इसे राज्य और यहां के लोगों के साथ खुला अन्याय करार दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब झारखंडी इस अन्याय को चुपचाप सहने वाले नहीं हैं.

हेमंत सोरेन ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि झारखंड के आदिवासी, मूलवासी और गरीबों को कमजोर या ‘बोका’ समझने की भूल न करे. उन्होंने कहा कि झारखंडी अपने हक के लिए लड़ना जानते हैं. जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर आंदोलन भी करेंगे और कानून के दायरे में रहकर भी अधिकार लेकर रहेंगे.

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकारों पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 2014 के उस चुनावी वादे की याद दिलायी, जिसमें हर खाते में 15-15 लाख रुपये देने की बात कही गयी थी. उन्होंने कहा कि इतने साल बीत जाने के बाद भी वह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ. यह उदाहरण बताता है कि किस तरह झारखंड और देश की जनता को केवल सपने दिखाये गये.

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि यह स्थापना दिवस इसलिए अलग और भारी मन वाला है, क्योंकि पहली बार गुरुजी शिबू सोरेन शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं. गांधी मैदान में उत्सव, भीड़ और रौनक के बावजूद मन में खालीपन और उदासी है. गुरुजी ने जल, जंगल और जमीन के लिए जो संघर्ष किया, वह झारखंड के इतिहास का अमिट हिस्सा है.

हेमंत सोरेन ने गुरुजी के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को जागरूक किया. इस दौरान गुरुजी को जेल भी जाना पड़ा और सत्ता से सीधे टकराव भी हुआ. उन्होंने उस दौर का जिक्र किया, जब गुरुजी को उग्रवादी बताकर एनकाउंटर तक का आदेश जारी किया गया था, लेकिन बाद में सरकार को सच्चाई समझ में आयी और आदेश वापस लेना पड़ा.

मुख्यमंत्री ने अपनी गिरफ्तारी और जेल जाने का जिक्र करते हुए कहा कि सामंती सोच वाली सरकार ने उन्हें फंसाने का काम किया. लेकिन झारखंड की जनता मजबूती से उनके साथ खड़ी रही. उन्होंने कहा कि जेल में रहने के बावजूद उनकी पार्टी ने चुनाव में पहले से ज्यादा सीटें जीतीं, जो जनता के भरोसे का प्रमाण है.

हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि झारखंड में कोई भी भूख से न मरे. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को पढ़ायें-लिखायें और बीडीओ, सीओ, आईएएस, जज और पत्रकार बनायें, ताकि व्यवस्था के भीतर रहकर भी झारखंड के हितों की रक्षा की जा सके.

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. सभी गतिविधियां हमारी नजर में हैं. हमारे विरोधी हमें कमजोर समझते रहे, लेकिन उनकी चाल चलने से पहले ही उनके राजनीतिक षड्यंत्र को ध्वस्त कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि अब झारखंड के लोग राजनीतिक चक्रव्यूह और साजिशों को अच्छी तरह समझने लगे हैं. आने वाले नगर निकाय चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक माहौल को लेकर लोगों में उत्साह साफ दिख रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ठंड में भी गांधी मैदान में उमड़ी भीड़ झारखंड की एकजुटता का प्रमाण है. उन्होंने बुजुर्गों, माताओं-बहनों और युवाओं को नमन और जोहार किया. स्थापना दिवस पर दिशोम गुरुजी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने संकल्प लेने की अपील की कि सभी लोग अपने बच्चों को पढ़ाएंगे, लिखाएंगे और काबिल बनाएंगे. शिक्षा के जरिए राज्य, गांव और समाज का नाम रोशन करने की अपील के साथ उन्होंने राज्य के कोने-कोने से आए लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया.

कार्यक्रम के दौरान झामुमो नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के साथ की जा रही कथित आर्थिक उपेक्षा का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. एसआईआर सहित विभिन्न योजनाओं में राज्य के हिस्से की राशि नहीं दिये जाने पर कड़ा ऐतराज जताया गया.

झामुमो नेताओं ने आरोप लगाया कि कोयला रॉयल्टी, खनिज राजस्व और केंद्रीय करों में झारखंड के बकाया हिस्से को रोकना राज्य के विकास के साथ सीधा अन्याय है. उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए झामुमो अपनी मूल विचारधारा पर अडिग रहेगी.

 

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