नई दिल्ली. ईरान में 28 फरवरी से जारी भीषण युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट पर उपजे नाकेबंदी जैसे हालातों ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, भारतीय नौसेना की अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद (INS Trikand) दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी तैनाती के तहत तंजानिया के दार एस सलाम बंदरगाह पहुँचा है। यह ‘पोर्ट कॉल’ न केवल समुद्री सुरक्षा बल्कि भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।
पोर्ट कॉल का उद्देश्य और गतिविधियाँ
भारत और तंजानिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे:
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पेशेवर बातचीत: भारतीय और तंजानियाई नौसेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी समन्वय) बढ़ाने पर चर्चा।
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सामुदायिक कार्यक्रम: मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबले, योग सत्र और एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन।
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रणनीतिक भेंट: जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सचिन कुलकर्णी तंजानिया सरकार के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और भारत द्वारा भेजी गई ‘क्रिटिकल स्टोर्स’ (महत्वपूर्ण सामग्री) सौंपेंगे।
तंजानिया: भारत की गैस समस्या का संभावित समाधान
ईरान युद्ध की वजह से भारत के लिए नैचुरल गैस की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में तंजानिया एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है:
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विशाल भंडार: तंजानिया के पास लगभग 57.54 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भंडार है, जो मुख्य रूप से सोंगो सोंगो, मनाजी बे और रवु बेसिन में स्थित है।
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निर्यात की संभावनाएं: तंजानिया वर्तमान में एलएनजी (LNG) परियोजनाओं के जरिए निर्यात बढ़ाने पर काम कर रहा है। भारत 2018 से ही इस क्षेत्र में निवेश और व्यापार के लिए सक्रिय है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत: तंजानिया को इन संसाधनों के पूर्ण दोहन के लिए बड़े निवेश की दरकार है, जिसे भारत अपनी तकनीक और पूंजी के जरिए पूरा कर सकता है।
भारत-तंजानिया संबंध: एक मजबूत साझेदारी
भारत, तंजानिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच 6.4 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। भारत मुख्य रूप से दवाइयां और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करता है, जबकि तंजानिया से सोना और खनिज आयात करता है। तंजानिया में भारतीय मूल की बड़ी आबादी इन सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को और भी प्रगाढ़ बनाती है।
‘सागर’ (SAGAR) विजन और सुरक्षा
आईएनएस त्रिकंद की यह यात्रा भारत की ‘MAHASAGAR’ (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) पहल का हिस्सा है। इससे पहले यह जहाज मोजाम्बिक में मानवीय सहायता (HADR) पहुंचाकर लौटा है। हिंद महासागर में एक ‘प्रथम प्रतिक्रियादाता’ (First Responder) के रूप में भारतीय नौसेना की यह मौजूदगी चीन जैसे देशों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की रणनीतिक पकड़ को मजबूत करती है।
पोर्ट कॉल क्या है? जब कोई सैन्य या वाणिज्यिक जहाज किसी विदेशी बंदरगाह पर ईंधन, राशन, मरम्मत या कूटनीतिक उद्देश्यों के लिए आधिकारिक तौर पर रुकता है, तो उसे ‘पोर्ट कॉल’ कहा जाता है। नौसेना के संदर्भ में इसका उपयोग दो देशों के बीच सैन्य सहयोग और दोस्ताना संबंधों को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
