ईरान-इजरायल युद्ध: इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और स्टील प्लांट्स पर किया हमला; ट्रंप की डेडलाइन के बीच ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ से दहला तेहरान

नेशनल

तेहरान/तेल अवीव. मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है. इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत ईरान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों और बड़े स्टील कारखानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि इजरायल को इन ‘अपराधों’ के लिए बहुत भारी कीमत चुकानी होगी. अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर इस हमले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई कूटनीतिक डेडलाइन का खुला उल्लंघन बताया है.

इजरायल की ओर से आधिकारिक पुष्टि करते हुए IDF ने बताया कि अराक (Arak) स्थित ‘हैवी वाटर प्लांट’ और यज्द (Yazd) की यूरेनियम फैसिलिटी को निशाना बनाया गया है. इजरायल का दावा है कि ये ठिकाने परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल और प्लूटोनियम तैयार कर रहे थे, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा थे.

हमले में जान-माल का नुकसान:

  • स्टील प्लांट्स पर प्रहार: ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, इस्फहान की ‘मोबारके स्टील कंपनी’ और ‘खुजेस्तान स्टील कंपनी’ पर हुए हमलों में भारी नुकसान हुआ है.

  • हताहत: इस्फहान के डिप्टी गवर्नर जनरल अकबर सालेही ने पुष्टि की है कि मोबारके स्टील प्लांट में एक कर्मचारी की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए हैं. वहीं, खुजेस्तान में हुए हमले में 16 लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं.

  • बुनियादी ढांचा: हमलों में एक पावर प्लांट को भी निशाना बनाया गया है, जिससे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है.

डोनाल्ड ट्रंप का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और 10 दिन की मोहलत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में आयोजित ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट’ में कहा कि उनका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) ईरान की सैन्य और आर्थिक कमर तोड़ रहा है. हालांकि, इस घटनाक्रम में एक बड़ा पेंच तब आया जब ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उन्होंने ईरानी सरकार के अनुरोध पर ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को 6 अप्रैल 2026, रात 8 बजे (ET) तक के लिए टाल दिया है. ईरान का आरोप है कि इजरायल ने इस मोहलत और कूटनीतिक मर्यादा का उल्लंघन कर अमेरिका के साथ मिलीभगत से यह हमला किया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इस हमले का जवाबी पलटवार करता है, तो 6 अप्रैल की डेडलाइन से पहले ही खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध की स्थिति बन सकती है.

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