जमशेदपुर. जब पश्चिम एशिया के समंदर पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और ईरान-इजरायल तनाव के कारण पूरी दुनिया की नजरें ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, तब जमशेदपुर का एक जांबाज इंजीनियर मौत को मात देकर वतन वापस लौटा है. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के जहाज ‘शिवालिक’ पर तैनात सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने 13 मार्च को वह खतरनाक रास्ता पार कर लिया, जिसकी दुआ पूरा देश कर रहा था. सोमवार, 16 मार्च 2026 को उनका जहाज करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लेकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया है.
13 मार्च की वह ‘अग्निपरीक्षा’: अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को ड्यूटी जॉइन की थी. यूएई, कतर और सऊदी अरब से इंडियन ऑयल के लिए गैस लेकर निकले इस जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज’ से गुजरना था. 13 मार्च को जब तनाव चरम पर था, तब पूरा त्रिपाठी परिवार टीवी के सामने सांसें रोककर बैठा था. फोन संपर्क कटा हुआ था और समंदर में महाशक्तियों की जंग का साया था. अंततः भारत सरकार की कूटनीति और अपनी सूझबूझ के बल पर अंश इस मिशन को पूरा करने में सफल रहे.
भावुक हुआ परिवार, छलक आए आंसू: जमशेदपुर के पारडीह आशियाना वुडलैंड स्थित अंश के घर में आज उत्सव का माहौल है.
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पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी (सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक, UCIL): बातचीत के दौरान फफक पड़े और कहा कि पिछले एक हफ्ते से नींद आंखों से कोसों दूर थी. अब लग रहा है कि सीने से कोई भारी पत्थर हट गया है.
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मां चंदा त्रिपाठी: उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मीडिया में खतरे की खबरें सुनकर रूह कांप जाती थी. आज मोदी सरकार की पहल और भगवान की कृपा से मेरा लाल सुरक्षित है.”
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पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी (CA, टाटा स्टील): उन्होंने बताया कि संपर्क पूरी तरह कटा होने के कारण हर पल एक अनहोनी का डर था, लेकिन अब वे राहत महसूस कर रही हैं. उनका 2 वर्षीय बेटा तनय भी पिता की वापसी की राह देख रहा है.
अंश त्रिपाठी का करियर शानदार रहा है. एमएनपीएस (MNPS) से स्कूली शिक्षा और बीआईटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने 2014 में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जॉइन किया था. आज वे न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे जमशेदपुर और देश के लिए एक हीरो बनकर उभरे हैं, जिन्होंने ऊर्जा संकट के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर वतन के लिए ‘ईंधन’ पहुंचाया.
