जमशेदपुर. जमशेदपुर के परसुडीह हाट में इन दिनों अजीब हालात हैं. एक तरफ लोग रोज की तरह सामानों की खरीद-बिक्री कर रहे हैं, दूसरी तरफ डर भी साथ-साथ चल रहा है. कृषि उत्पादन बाजार समिति के तहत आने वाले इस हाट की पक्की दुकानों को भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने खतरनाक घोषित कर दिया है. हैरानी की बात यह है कि जिन इमारतों को सरकारी रिकॉर्ड में असुरक्षित बताया गया है, उन्हीं के नीचे 200 से ज्यादा दुकानें रोज खुल रही हैं. दुकानदार काम कर रहे हैं, ग्राहक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन हर कोई अनजाने में जोखिम उठा रहा है. किसी भी वक्त हादसा हो सकता है, फिर भी न दुकानों को बंद किया गया है और न ही लोगों को वहां से हटाया गया है. ऐसे में दुकानदार और ग्राहक दोनों ही हर पल खतरे के साये में हैं.
दुकान के बगल से बड़े वाहन गुजरने पर कई बार दुकान की छतों में कंपन होने लगता है, कई बार प्लास्टर झड़ कर गिर जाते हैं. लगते हैं. यहां की दुकानों की छतें बिना भूकंप के ही कांपती रहती है, न तो प्रशासन इन्हें खाली करा रहा है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है. ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. इस जर्जर भवन में प्रतिदिन लाखों का कारोबार हो रहा है, लेकिन इंसान की जान की कीमत शून्य नजर आ रही है.
भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने तकनीकी जांच के बाद स्पष्ट कर दिया है कि इन दुकानों का ढांचा अब मरम्मत के लायक भी नहीं बचा है. इसके बाद दुकान को ध्वस्त करने की अनुशंसा की गयी. बाजार समिति बोर्ड के निर्देशानुसार दुकानदारों को दुकान खाली करने का नोटिस दिया गया, ताकि कंडम दुकान को ध्वस्त करने के बाद फिर से नया ढांचा खड़ा किया जा सके, लेकिन दुकानदारों ने दुकानों को खाली करने से मना कर दिया. मामला विधायक तक पहुंचा, तो उन्होंने भी पक्की दुकानों की पुनः तकनीकी जांच की मांग उठायी. इसी बीच मामला को जिला की दिशा बैठक में उठाया गया, इसके बाद ग्राउंड फ्लोर नाहीं तोड़ने व प्रथम तल्ले को कंडम बताया गया. वर्तमान समय में प्रथम तल्ले पर किसी तरह की गतिविधि चलाने पर पूरी रोक लगायी गयी है, जबकि ग्राउंड फ्लोक पर दुकानें चल रही हैं. आए दिन प्लास्टर, छज्जा व रेलिंग गिरते हैं. गनीमत है कि अब तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई और न ही किसी को गंभीर चोट लगी है.
इंजीनियर की रिपोर्ट मिलने के बाद गेंद अब बाजार समिति के पाले में है. समिति ने अब तक दुकानदारों के लिए किसी भी अस्थायी शेड या वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था नहीं की है. बिना किसी प्लान के दुकानों को हटाने का मतलब है बड़े जन-आक्रोश को निमंत्रण देना. यही कारण है कि अधिकारी केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं और जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है. इधर, बाजार समिति प्रथम तल्ले के दुकानदारों को नोटिस दिया. लेकिन, एक भी दुकानदार ने न तो दुकान सरेंडर किया और न ही नोटिस का कोई जवाब ही दिया. वर्तमान समय में प्रथम तल्ले की दुकानें जर्जर व टूटी-फूटी हालत में हैं. शटर पूरी तरह सड़क गये हैं, जहां शाम में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है.
हैरानी की बात यह है कि जिस भवन को सरकारी तौर पर ‘असुरक्षित मान लिया गया है, वहां से अब भी किराया वसूला जा रहा है. नियमतः कंडम घोषित होने के बाद व्यावसायिक गतिविधिया अवैध हो जाती है. ऐसे में क्या इन दुकानों से किराया लेना कानूनी रूप से वैध है? यदि बाजार समिति किराया ले रही है, तो वह इन दुकानदारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती.
दुकानदारों की सुरक्षा सर्वोपरि : अभिषेक
कृषि उत्पादन बाजार समिति के सचिव अभिषेक आनंद ने कहा कि पर सुडीह हाट की पक्की दुकानों को री-डेवलपमेंट किया जाना था. लेकिन, दुकानदारों ने दुकाने खाली करने से मना कर दिया. फिर दुकानों का मामला दिशा की बैठक में उठाया गया, तो प्रथम तल्ले को कंडम बताया गया, जबकि ग्राउंड फ्लोर को प्रथम तल्ले की अपेक्षाकृत काफी अच्छा बताया. फिलहाल प्रथम तल्ले से कोई किराया नहीं वसूला जा रहा है. केवल पक्की दुकान के ग्राउंड फ्लोर वाले दुकान से किराया वसूला जा रहा है. दुकानदारों की सुरक्षा संवर्वोपरि है और जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाये जायेंगे.
ग्राहकों की सुरक्षा राम भरोसे
परसुडीह हाट केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है. यहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और शहर के लोग खरीदारी करने आते हैं. हाट के दिनों में यहां भीड़ दोगुनी हो जाती है. जर्जर खभी और लटकती छतों के बीच से गुजरने वाले इन मासुम ग्राहकों को शायद यह भी नहीं पता कि वे किस खतरे के बीच खड़े हैं. कोई भी मामूली कंपन या भारी बारिश एक बड़ी त्रासदी का सबब बन सकती है.
