कोलकाता. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल के उल्लंघन को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कड़ा पत्र लिखकर रविवार शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. पत्र में विशेष रूप से दार्जिलिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के स्थल में हुए बदलाव और राष्ट्रपति के स्वागत के दौरान की गई व्यवस्थाओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है. केंद्र ने इस चूक के कारणों और जिम्मेदारियों पर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है.
भारत सरकार के आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार, राष्ट्रपति के सार्वजनिक दौरों पर उनका स्वागत और विदाई राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी द्वारा की जानी अनिवार्य है. यदि मुख्यमंत्री उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो उनके स्थान पर किसी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री का होना जरूरी है. हालांकि, बंगाल दौरे के दौरान राष्ट्रपति का स्वागत केवल मेयर, डीएम और सीपी ने किया, जबकि मुख्यमंत्री या कोई भी वरिष्ठ मंत्री वहां मौजूद नहीं थे. नियमों के मुताबिक, जिला अधिकारी निर्वाचित नेतृत्व (मुख्यमंत्री या मंत्री) का स्थान नहीं ले सकते. प्रोटोकॉल की इसी अनदेखी और अव्यवस्था को लेकर अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है.
