नई दिल्ली. विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए मंगलवार को सदन में एक संकल्प पेश किया गया. समर्थन में 50 से अधिक सांसदों के खड़े होने के बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इस संकल्प को प्रस्तुत करने की अनुमति दी, जिसके बाद सदन में चर्चा शुरू हुई. हालांकि, कार्यवाही शुरू होने से पहले ही एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए जगदंबिका पाल के पीठासीन होने की वैधता पर सवाल उठा दिया. ओवैसी के इस विरोध के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उन्हें करारा जवाब दिया, जिससे सदन में काफी देर तक गहमागहमी बनी रही.
असदुद्दीन ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 96 और लोकसभा नियमों का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि चूंकि ओम बिरला ने ही जगदंबिका पाल की नियुक्ति की है, इसलिए वे इस संकल्प के दौरान सभापति की भूमिका नहीं निभा सकते. ओवैसी की इस दलील का कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी समर्थन किया. इसके पलटवार में निशिकांत दुबे ने अनुच्छेद 95 (2) का हवाला देते हुए कहा कि बैरिस्टर साहब ने शायद नियमों को पूरा नहीं पढ़ा है, क्योंकि आसन पर बैठा व्यक्ति अध्यक्ष के समान ही अधिकारों का हकदार होता है. भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी इसका समर्थन किया, जिसके बाद जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं है, इसलिए व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठता.
