पटना हॉस्टल कांड: ‘FIR दर्ज न हो, इसकी कोशिश हुई… , NEET छात्रा मौत केस में SSP का बड़ा खुलासा

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पटना. NEET छात्रा की मौत के मामले पर बुधवार को पटना पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों ने अब तक की जांच की जानकारी दी. करीब 15 मिनट तक चली इस PC में पुलिस ने अपना पक्ष रखा, लेकिन सवालों से बचते नजर आई. जैसे ही पत्रकारों ने सवाल पूछने शुरू किए, SSP कार्तिकेय शर्मा ने “नो कमेंट्स” कहा और सभी अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए. बाहर भी सवाल पूछे जाने पर अधिकारी तेजी से अपनी-अपनी गाड़ियों में बैठकर निकल गए.

SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि पीड़िता 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी. हॉस्टल स्टाफ ने दरवाजा खोला, जिसके बाद छात्रा को डॉक्टर सहजानंद के अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां से बेहतर इलाज के लिए परिजन उसे प्रभात मेमोरियल अस्पताल लेकर गए.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि शुरुआत में इस मामले में केस दर्ज न हो, इसकी कोशिश की गई थी. हालांकि प्रभात मेमोरियल अस्पताल ने 6 जनवरी को ही थाने को सूचना दे दी थी. इसके बाद एक महिला सब-इंस्पेक्टर अस्पताल पहुंचीं और परिजनों से मुलाकात की. उस समय यह फैसला लिया गया कि छात्रा होश में आने के बाद ही बयान लिया जाएगा. SSP ने बताया कि महिला सब-इंस्पेक्टर ने परिजनों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया था, ताकि किसी भी जानकारी के लिए संपर्क किया जा सके.

इसके बाद 9 जनवरी को महिला सब-इंस्पेक्टर को फोन किया गया. वे फिर अस्पताल पहुंचीं और परिजनों का फर्द बयान दर्ज किया गया. SSP ने माना कि चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी से लापरवाही हुई है और इस पर कार्रवाई की जा रही है.

पुलिस के मुताबिक, घटना की जानकारी सबसे पहले पीड़िता के परिवार को दी गई थी. SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. परिवार ने पुलिस को छात्रा के पांच कपड़े सौंपे थे. इनमें से एक कपड़े से स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है.

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