रांची: रसोई गैस की किल्लत से ‘छोटू सिलेंडर’ गायब; 320 रुपये किलो तक पहुंची कीमत, छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट

झारखंड

रांची. देशभर में जारी ऊर्जा संकट का असर अब झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर साफ दिखने लगा है. विशेष रूप से 5 किलो वाले ‘छोटू सिलेंडर’ की भारी किल्लत ने शहर के छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों की कमर तोड़ दी है. खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और आपूर्ति बाधित होने के कारण कॉमर्शियल गैस की कमी हो गई है, जिससे चाय-नाश्ता बेचने वाले दुकानदारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. स्थिति का जायजा लेने पर शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से डराने वाली तस्वीरें सामने आई हैं.

शहर के प्रमुख इलाकों का हाल:

  • अल्बर्ट एक्का चौक: राजधानी के इस हृदय स्थल पर छोले-भटूरे और फास्ट फूड बेचने वाले दुकानदार बेहद परेशान हैं. छोटू सिलेंडर न मिलने के कारण कई दुकानदार मजबूरन महंगे दामों पर घरेलू सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है और मुनाफा खत्म होने की कगार पर है.

  • अटल वेंडर मार्केट (कचहरी चौक): यहां मोमो और चाट बेचने वाले दुकानदार प्रशासन की कार्रवाई के डर से सिलेंडरों को बोरों में छिपाकर इस्तेमाल करने को मजबूर हैं. दुकानदारों का कहना है कि गैस की कमी के कारण ठेला लगाना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है.

  • पुरानी हजारीबाग रोड: इस इलाके में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है. दुकानदारों ने बताया कि जो गैस पहले 120-140 रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसके लिए अब 320 रुपये प्रति किलो तक का भुगतान करना पड़ रहा है.

आम जनता पर दोहरी मार: गैस की इस किल्लत का सीधा असर दफ्तरों और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है. छोटे होटलों और ठेलों पर खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं या मिलनी बंद हो गई हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उछाल के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह प्रभावित हुई है. हालांकि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, लेकिन कॉमर्शियल उपयोग करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए फिलहाल कोई राहत नजर नहीं आ रही है.

स्थानीय प्रशासन और आपूर्ति विभाग की ओर से अब तक इस कालाबाजारी और किल्लत को रोकने के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है. दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि छोटे वेंडरों के लिए गैस की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि उनका चूल्हा जलता रहे.

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