रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा झारखंड पुलिस को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 1475 नए गश्ती वाहन सौंपे जाने के बाद भी राजधानी रांची की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी खामी नजर आ रही है. जिले के अधिकतर थानों में करोड़ों की लागत से आए ये नए वाहन अब भी निजी (प्राइवेट) चालकों के भरोसे सड़क पर दौड़ रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक, रांची जिले को 80 नई बोलेरो और 849 दोपहिया वाहन मिले हैं, लेकिन धुर्वा, जगन्नाथपुर, डोरंडा, अरगोड़ा और बरियातू जैसे महत्वपूर्ण थानों में गश्ती की जिम्मेदारी सरकारी चालकों के बजाय प्राइवेट ड्राइवरों के कंधों पर है.
हैरानी की बात यह है कि जिले में आरक्षी और हवलदार रैंक के कुल 238 सरकारी चालक तैनात हैं, जिनमें से ज्यादातर बड़े अधिकारियों (एसएसपी, एसपी, डीएसपी) की गाड़ियों में नियुक्त हैं. डीजीपी ने अगस्त 2025 में ही सभी जिलों को निर्देश दिया था कि थानों से प्राइवेट चालकों और मुंशियों को तुरंत हटाया जाए, क्योंकि इससे पुलिस की गोपनीयता और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा भंग होने का खतरा रहता है. हालांकि, पीसीआर और हाईवे पेट्रोलिंग के 45 वाहनों में 90 सरकारी चालकों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन थाना स्तर पर गश्ती वाहनों के लिए अभी भी सरकारी चालकों की भारी कमी बनी हुई है.
