…लाल आतंक का हुआ खात्मा, सुरक्षाबलों के साथ मूङभेङ में ढेर हुआ नक्सली संगठन का रीढ

गिरिडीह

By: मृणाल सिन्हा

गिरिडीह. देश की कई राज्यों की पुलिस और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों को जिस मोस्टवांटेङ एक करोङ के इनामी नक्सली की तलाश कई वर्षो से थी, आखिरकार उस मोस्टवांटेङ नक्सली के साथ एक दर्जन से अधिक नक्सलियों को ढेर करने काम झारखंड की पुलिस ने आज कर दिया है. जिस एक करोङ के इनामी नक्सली को झारखंड पुलिस और अलग-अलग सुरक्षाबलों के जवानों ने ढेर किया है, उसका नाम अनल दा उर्फ ‘तूफान’ उर्फ पतिराम मांझी था, जिसे पतिराम मरांडी और रमेश के नाम से भी जाना जाता था. पतिराम मांझी गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र के झरहाबेला गांव का रहने वाला था. इसकी तलाश लंबे समय से देश के अलग-अलग राज्यों की पुलिस के साथ-साथ देश की कई सुरक्षा ऐजेंसियां कर रही थी. बुधवार को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के बीहङ जंगल वाले सारंङा के क्षेत्र में एक करोङ के इनामी नक्सली अनल दा के दस्ते के साथ पहुंचने की सूचना के बाद पूरे झारखंड की पुलिस अलर्ट हो गयी और पूरे क्षेत्र को घेरकर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया. रात भर जंगलों में पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान नक्सलियों को ढूंढने में जुटे हुए थे. इसी बीच नक्सलियों की ओर से ताबङतोङ गोलीबारी शुरू कर दी गयी, जिसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर कर पूरे क्षेत्र को सील कर दिया और जवाबी कार्रवाई करते हुए नक्सलियों को जवाब देना शुरू कर दिया. इसी मूङभेङ में सुरक्षाबलों को सबसे बङी कामयाबी मिली और जवानों ने एक करोङ के इनामी नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल दा को ढेर कर दिया. इसके अलावे अनल दा के दस्ते में शामिल करीब एक दर्जन से अधिक नक्सलियों को भी जवानों ने मार गिराया है जिनमें कुछ इनामी और बङे नक्सलियों के भी मारे जाने की खबर है. हालांकि अभी पुलिस पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही है और मारे गये नक्सलियों की शिनाख्त करने में जुटी हुई है.

 

नक्सलियों का रणनीतिकार माना जाता था पतिराम मांझी उर्फ अनल दा

अनल दा उर्फ पतिराम मांझी उर्फ तूफान उर्फ रमेश नक्सलियों का रणनीतिकार माना जाता था. नक्सली घटनाओं को अंजाम देने के पीछे पूरी कहानी इसी के द्वारा लिखी जाती थी. कई बड़े नक्सल हमले में इसका नाम सामने रहा है. इसके आतंक को देख कर पुलिस ने इसके ऊपर एक करोड़ का इनाम रखा था. लेकिन इसने जंगल में ही अपनी मौजूदगी रखी. अनल दा मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांङ थाना क्षेत्र के झरहाबेला गांव का रहने वाला था और लंबे समय से जंगल ही इसका ठिकाना है.

कौन है अनल दा उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी

अनल दा उर्फ ‘तूफान’? अनल दा उर्फ तूफान का असली नाम पतिराम मांझी था, जिसे पतिराम मरांडी और रमेश के नाम से भी जाना जाता था. वह गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र के झरहाबाले गांव का रहने वाला था. उसके पिता का नाम टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी है. अनल दा भाकपा (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (सीसीएम) था और संगठन के सबसे ताकतवर रणनीतिकारों में गिना जाता था. सुरक्षाबलों के मुताबिक, वह झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में बड़े हमलों की योजना, हथियारों की सप्लाई और कैडर मूवमेंट का जिम्मा संभालता था. कई बड़े नक्सली हमलों में उसकी भूमिका मानी जाती रही है.
सुरक्षाबलों के हिट लिस्ट में था अनल दा
अनल दा लंबे समय से सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था. उस पर झारखंड सरकार और केंद्र की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. दो वर्ष पूर्व जब नक्सलियों के थिंक टैंक माने जाने वाले एक करोङ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस को सुरक्षाबलों ने जब गिरफ्तार किया था, तब नक्सली संगठन पूरी तरह से टूट गया था और कमजोर पङ गया था. जिसके बाद पतिराम मांझी उर्फ अनल दा ने संगठन को संभाला ओर एक बार फिर से गिरिडीह के पारसनाथ, सारंडा, बूढ़ा पहाड़ और कोल्हान क्षेत्र में नक्सली संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटा हुआ था. यही वजह थी कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में थीं.

अनल दा की मौत के बाद नक्सली संगठन की कमर पूरी तरह टूटी

अनल दा की मौत से माओवादी संगठन की कमर टूट गई है. वह संगठन की रीढ़ माना जाता था और उसके मारे जाने से नक्सलियों की रणनीति और नेतृत्व पर गहरा असर पड़ेगा. सुरक्षा बलों ने जिस प्रकार से मुठभेड़ स्थल से आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और नक्सली दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, क्योंकि कुछ नक्सलियों के जंगल में भागने की आशंका जताई जा रही है. सुरक्षाबलों का कहना है कि देशभर में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान के तहत आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है. अनल दा उर्फ तूफान का खात्मा यह संकेत देता है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और सुरक्षाबल किसी भी कीमत पर शीर्ष नेतृत्व को बख्शने के मूड में नहीं हैं.

गिरिडीह जिले में अनल दा उर्फ पतिराम मांझी के खिलाफ दर्ज है 100 से अधिक मामले

एक करोङ के इनामी नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल दा के खिलाफ सिर्फ गिरिडीह जिले में ही 100 से अधिक मामले दर्ज है. एक दौर था जब गिरिडीह के पारसनाथ पर्वत पर नक्सलियों का खौफ रहता था. उस वक्त् अनल दा पारसनाथ पर्वत को ही अपना सेफ जोन बनाया हुआ था. इतना ही नहीं पारसनाथ पर्वत पर कई बङे और इनामी नक्सलियों की बैठक भी होती थी और पूरे देश भर में नक्सली घटनाओं को अंजाम देने की रणनीति तैयार की जाती थी. पिछले दो वर्ष पूर्व जब नक्सलियों के थिंक टैंक माने जाने वाले एक करोङ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस पारसनाथ पर्वत आयें थे, तब यहां कई बङे और इनामी नक्सलियों का भी जुटान हुआ था. हालांकि प्रशांत बोस के पारसनाथ में आने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा ऐजेंसियों की टीम एक्टिव हो गयी थी और आखिरकार रणनीति तैयार कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद से लगातार पतिराम मांझी उर्फ अनल दा नक्सली संगठन की कमान संभाले हुए था. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अनल दा वैसे तो पीरटांङ का रहने वाला था, लेकिन बचपन से ही वह जंगलों में रहना पसंद करता था. यही कारण है कि जब वह मात्र 16 वर्ष की आयु में नक्सली संगठन में शामिल हो गया, इसके बाद फिर वह देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर बङे-बङे नक्सलियों के साथ रहने लगा और आज वह नक्सली संगठन का मुख्य रणनीतिकार बन गया था.

बस्तर के माङवी हिङमा की जगह पतिराम मांझी को मिली थी कमान

देश के सबसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र माने जाने वाले छतीशगढ के बस्तर में नक्सलियों की मिलिट्री बटालियन के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर जिस प्रकार से लगातार हाल के दिनों में बस्तर के इलाके में सुरक्षाबलों के द्वारा नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और उसमें कई बङे-बङे इनामी नक्सलियों को मार गिराया जा रहा है. इसके बाद बस्तर के इलाके में भी नक्सलियों का मिलिट्री बटालियन धीरे-धीरे कमजोर पङने लगा था. जिसके बाद बस्तर की मिलिट्री बटालियन नंबर एक के चीफ माङवी हिङमा की जगह झारखंड के खूंखार और एक करोङ के इनामी नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल दा को शामिल किया गया था. सेंटल कमिटी के द्वारा यह निर्णय इस लिये गया था, क्योंकि सेंट्रल कमिटी के टॉप टेन नक्सलियों में पतिराम मांझी उर्फ अनल दा सबसे यंग था.

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