सरायकेला: 25 वर्षों में हाथियों के हमले ने ली 171 जानें; चांडिल बना उत्पात का केंद्र, फाइलों में दबी हाथी कॉरिडोर योजना

झारखंड

सरायकेला। झारखंड गठन के बाद से ही सरायकेला वन प्रमंडल जंगली हाथियों के उत्पात से जूझ रहा है. विशेषकर चांडिल वन क्षेत्र पिछले एक दशक से हाथियों के आतंक का मुख्य केंद्र बना हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों में इस प्रमंडल में हाथियों और अन्य जानवरों के हमले में 171 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 240 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

वर्तमान स्थिति: 22 हाथियों का झुंड सक्रिय

फिलहाल चांडिल अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में हाथियों का दो अलग-अलग झुंड डेरा डाले हुए है:

  • नीमडीह (आंडा गांव): यहाँ 16 जंगली हाथियों का झुंड मौजूद है, जो दिन में चांडिल डैम में जलक्रीड़ा करते और शाम होते ही गांवों में उत्पात मचाते देखे जा रहे हैं.

  • कुकड़ू (सापारुम): बंगाल सीमा से सटे इस गांव में 6 हाथी सक्रिय हैं. ग्रामीण अपनी फसलों को बचाने के लिए रात भर मशाल लेकर पहरा देने को मजबूर हैं.

हादसों का खौफनाक इतिहास

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे भयावह स्थिति वर्ष 2004-05 में थी, जब हाथियों ने 28 लोगों को कुचलकर मार डाला था.

  • हालिया मौतें: वर्ष 2025 में कुंती देवी (आंडा) और गौरांग महतो (लेटेमदा) की जान गई, जबकि 2026 में अब तक राधा तंतुबाई (सापारुम) की मौत हाथी के हमले में हो चुकी है.

  • यौन अनुपात: जानकारों के अनुसार, यहाँ हाथियों का यौन अनुपात लगभग 1:8 है. अनुपात असंतुलित होने और भोजन की कमी के कारण हाथी अक्सर आक्रामक हो जाते हैं.

प्रशासनिक विफलता: फाइलों में कैद ‘कॉरिडोर’

चांडिल से ओडिशा बॉर्डर तक हाथी कॉरिडोर विकसित करने की योजना लंबे समय से फाइलों में दबी हुई है. कॉरिडोर में अवरोध के कारण ही हाथी जंगलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुँच रहे हैं.

  • हाथी भगाओ दस्ता: वर्तमान में गयाराम महतो के नेतृत्व में केवल एक दस्ता सक्रिय है.

  • वन विभाग की अपील: प्रभारी वनपाल मुकेश कुमार महतो ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के साथ फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश न करें और शाम के समय उग्र व्यवहार को देखते हुए उन्हें न छेड़ें. विभाग अब वैकल्पिक दस्ते और सर्च लाइट जैसे संसाधनों के जरिए स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है.


सरायकेला वन प्रमंडल: मौत और घायलों का सांख्यिकीय विवरण

वित्तीय वर्ष मृतकों की संख्या घायलों की संख्या
2004-05 28 08
2011-12 12 10
2020-21 11 18
2025-26 02 12
2026-27 (अब तक) 01 02
कुल (25 वर्ष)

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