बाबा के चमत्कार की है कहानी हर साल पौष पूर्णिमा में चादर पोशी एवं मेला का होता है का आयोजन

गिरिडीह

सांप्रदायिक सौहार्द और अटूट आस्था का केंद्र है खरगडीहा स्थित लंगटा बाबा समाधि स्थल, 1910 में ली थी समाधी 1870 के दशक में लंगटा बाबा नागा साधुओं के बड़ा समूह के साथ खरगडीहा पहुंचे थे,

गिरिडीह. गिरिडीह जिले के जमुआ – देवघर मुख्य मार्ग स्थित खरगडीहा उसरी तट पर स्थित संतों के महान संत लंगटा बाबा का 116 वां वर्षगांठ कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय जमुआ पुलिस प्रशासन एवं बाबा के भक्तों द्वारा या स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें लंगटा बाबा की समाधि पर विशेष पूजा-अर्चना ओर चादरपोसी की जाती है. खरगडीहा स्थित लंगटा बाबा समाधि स्थल सांप्रदायिक सौहार्द और अटूट आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. खरगडीहा में स्थित यह समाधि स्थल न केवल हिंदुओं बल्कि मुस्लिम समुदाय के लिए भी समान रूप से पूजनीय है. इसे झारखंड और बिहार के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है, जंहा सभी धर्मों के लोग मन्नतें मांगने आते हैं. लंगटा बाबा (मूल नाम लंगेश्वरी बाबा) 1870 के दशक में नागा साधुओं की एक टोली के साथ खरगडीहा आए थे. जब बाकी साधु चले गए, तो वे खरगडीहा थाना परिसर के पास ही रुक गए और अपनी धुनी रमाई. उन्होंने वर्ष 1910 में महासमाधि ली थी. सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: यह स्थल हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है.

समाधि पर चादरपोशी की परंपरा है.

एक रोचक परंपरा के अनुसार, समाधि पर पहली चादर जमुआ थाना के थाना प्रभारी (थानेदार) द्वारा चढ़ाई जाती है. यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब बाबा की समाधि पर तत्कालीन थानेदार बहाउद्दीन खान ने पहली चादर चढ़ाई थी. प्रत्येक वर्ष पौष पूर्णिमा (जनवरी माह) के दिन यहां बाबा का वार्षिक समाधि पर्व मनाया जाता है. इस अवसर पर एक विशाल मेला लगता है और हजारों की संख्या में श्रद्धालु चादरपोशी करने पहुंचते हैं.

मान्यताएं और चमत्कार :

भक्तों का विश्वास है कि यंहा बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाने से हर अधूरी मनोकामना पूरी होती है. बाबा को ‘पीड़ित मानवता का उद्धारक’ माना जाता है. उनके जीवन से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिनमें बीमार जानवरों और मनुष्यों को उनके आशीर्वाद से ठीक होते दिखाया गया है. सरकारी और प्रशासनिक भागीदारी, मेले के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जाते हैं.राजनेता, न्यायाधीश और अधिकारी भी बाबा का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं.सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस और प्रशासन द्वारा मेला के दौरान विशेष सुरक्षा, सीसीटीवी और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गई है. लंगटा बाबा की ख्याति झारखंड ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों तक फैली हुई है.

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