बंगाल चुनाव में टीएमसी की रणनीति: सागरिका घोष ने एसआईआर (SIR) को बताया भाजपा के खिलाफ बड़ा मुद्दा

नेशनल

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और स्टार प्रचारक सागरिका घोष ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर पर मौजूद सत्ता-विरोधी लहर (Anti-incumbency) अब ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया के प्रभाव से दब गई है. उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में टीएमसी की स्थिति भाजपा की तुलना में काफी मजबूत है. ममता बनर्जी द्वारा 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटने के फैसले को उन्होंने एंटी-इनकंबेंसी खत्म करने की एक सोची-समझी रणनीति बताया. सागरिका घोष ने सवाल उठाया कि भाजपा बार-बार जिन ‘घुसपैठियों’ की बात करती थी, वे कहां हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि जल्दबाजी में लागू एसआईआर ने अमर्त्य सेन और नंदिनी चक्रवर्ती जैसी बड़ी हस्तियों की नागरिकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे जनता में भाजपा के प्रति भारी नाराजगी है.

ममता बनर्जी को ‘दक्षिण एशिया का अद्वितीय राजनीतिक व्यक्तित्व’ बताते हुए सागरिका ने कहा कि मुख्यमंत्री का जमीनी जुड़ाव और शासन का रिकॉर्ड ही चुनाव में जीत का आधार बनेगा. उन्होंने टीएमसी को ‘महिला-प्रथम’ पार्टी बताते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने बिना किसी राजनीतिक विरासत के पुरुष प्रधान राजनीति में अपना स्थान बनाया है और महिलाओं के खिलाफ किसी भी अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सागरिका के अनुसार, इस चुनाव में पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठे प्रचार और अफवाहों से निपटना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *