गिरिडीह कॉलेज परिसर में आदिवासी छात्र संघ ने उल्लास के साथ मनाया सोहराय पर्व

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गिरिडीह. गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह के छात्रावास मैदान में आदिवासी छात्र संघ के द्वारा संताल समाज का महान पर्व सोहराय पूरे पारंपरिक विधि-विधान, हर्षोल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः नायके बाबा द्वारा जिला मांझी थान, बस स्टैंड के समीप गोट सीम बोंगा (पूजा) से की गयी. इसके पश्चात मांझी थान में दाअ दुल (जल अर्पण) कर समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गई. पूजा-अर्चना के उपरांत छात्राओं ने संताल परंपरा के अनुसार मांझी बाबा एवं नायके बाबा का पैर धोकर सम्मान प्रकट किया. यह दृश्य संताल समाज की सामाजिक एकता, सम्मान और संस्कारों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया. इसके बाद गिरिडीह जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए संताल समाज के युवक-युवतियों ने पारंपरिक नृत्य-गान प्रस्तुत किया. मांदर, तमाक की थाप और पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने पूरे परिसर को सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया.

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने सीम सोड़े (मुर्गा बिरयानी) को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया. वक्ताओं ने सोहराय पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संताल समाज का सबसे बड़ा पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम, प्रकृति से जुड़ाव और पशुधन के सम्मान का प्रतीक है. इस अवसर पर गाय, भैंस सहित अन्य पशुओं की पूजा की जाती है. यह पर्व प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में गांवों और शहरों में समान उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस भव्य आयोजन में कई समाजसेवी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिनमें छात्र संघ अध्यक्ष प्रदीप सोरेन, सचिव मदन हेंब्रम, श्याम सुंदर हांसदा, सन्तान मरांडी, सिकंदर हेंब्रम, प्रवीण मुर्मू, मुजी लाल टुडू, दिलीप मुर्मू, चांद सोरेन, सोना लाल मुर्मू, मिरु लाल मरांडी, अनिल हेंब्रम, रेणुका हांसदा, रोशीना सोरेन, नुनूराम किस्कू, दशरथ किस्कू, शमीर मुर्मू, हेंगा मुन्नी मुर्मू एवं सुधीर बास्के प्रमुख रूप से शामिल रहे. कार्यक्रम ने संताल समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सशक्त रूप से प्रस्तुत करते हुए सामाजिक एकता और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया.

 

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