धनबाद. धनबाद के चर्चित Asharfi Hospital एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि इलाज के दौरान मृत हुए मरीज के शव को बकाया बिल के कारण परिजनों को नहीं सौंपा गया। घटना की जानकारी मिलते ही धनबाद के नवनिर्वाचित महापौर Sanjeev Singh स्वयं अस्पताल पहुंचे और मामले में हस्तक्षेप कर परिजनों को शव दिलवाया।
जानकारी के अनुसार झरिया निवासी संजीत सिंह उर्फ गुड्डू सिंह सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए अशर्फी अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मृत्यु के बाद परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बकाया बिल का हवाला देते हुए शव को रोक लिया और पूरा भुगतान किए बिना शव देने से इनकार कर दिया। इस घटना से परिजन बेहद दुखी और आक्रोशित हो गए।
मामले की जानकारी मिलते ही महापौर संजीव सिंह अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में पैसों के लिए शव को रोकना बेहद अमानवीय और असंवेदनशील व्यवहार है।
महापौर संजीव सिंह ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने अस्पताल का बकाया बिल 20,894 रुपये अपनी ओर से भुगतान किया, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव परिजनों को सौंप दिया। साथ ही उन्होंने एम्बुलेंस की व्यवस्था कर शव को अस्पताल से मृतक के आवास तक पहुंचाने की भी व्यवस्था कराई और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन के रवैये को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। वहीं महापौर के हस्तक्षेप से पीड़ित परिवार को राहत मिली और शव का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा.
इस बाबत मेयर संजीव सिंह ने कहा की
“किसी भी परिस्थिति में पैसों के लिए शव को रोकना अमानवीय है। ऐसे संवेदनशील मामलों में मानवता सबसे पहले होनी चाहिए। जरूरतमंद परिवार की हर संभव सहायता की जाएगी।
