पश्चिम बंगाल चुनाव: पहले चरण के लिए वोटर लिस्ट फ्रीज; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार को जारी होगी अंतिम सूची, पर क्या अब भी जुड़ पाएंगे नाम?

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण के मतदान के लिए नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई. इसके साथ ही चुनाव आयोग (ECI) ने संबंधित सीटों के लिए मतदाता सूची को सोमवार आधी रात से फ्रीज कर दिया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब सबकी नजरें मंगलवार को जारी होने वाली अंतिम वोटर लिस्ट पर टिकी हैं. सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या सूची फ्रीज होने के बाद भी न्यायाधिकरण (Tribunal) के फैसले के आधार पर नए नाम जोड़े जा सकेंगे.

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और निगरानी समिति

देश की सर्वोच्च अदालत ने मतदाता सूची से नाम छूटने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है. अदालत ने न्यायाधिकरण के कामकाज की निगरानी के लिए एक विशेष समिति गठित करने का आदेश दिया है.

  • समिति की संरचना: इसमें पूर्व न्यायाधीश या वर्तमान न्यायाधीश शामिल होंगे.

  • प्रक्रिया: मुख्य न्यायाधीश मंगलवार तक पूरी प्रक्रिया तय करेंगे. अदालत ने निर्देश दिया है कि न्यायाधिकरण उन आवेदनों का निपटारा करे और जांच करे कि पात्र मतदाताओं के नाम क्यों छूटे.

  • सुनवाई: 13 अप्रैल को इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें मतदान अधिकारों के प्रयोग पर अंतिम आदेश जारी हो सकता है.

क्या 15 अप्रैल तक जुड़ सकते हैं नाम?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत नामांकन की अंतिम तिथि के बाद सूची फ्रीज कर दी जाती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष खिड़की खोलने का संकेत दिया है. अदालत ने कहा है कि 15 अप्रैल तक जिन भी अपीलों या आवेदनों का निपटारा होगा, उनके नाम संशोधित सूची में शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए. इससे उन पात्र मतदाताओं में उम्मीद जगी है जिनका नाम तकनीकी कारणों से सूची में नहीं था.

आधी रात के बाद की स्थिति

सोमवार को नामांकन का आखिरी दिन होने के कारण प्रथम चरण के सभी मतदान केंद्रों की सूची आधिकारिक तौर पर लॉक हो चुकी है. यदि ट्रिब्यूनल मंगलवार से काम शुरू करता है, तो भी तकनीकी रूप से नाम जोड़ना एक बड़ी चुनौती होगी. अब गेंद पूरी तरह से अदालत के पाले में है कि वह चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिक अधिकारों के बीच कैसे संतुलन बनाती है.

अदालत का निर्देश: ‘सुनना अनिवार्य है’

अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आवेदन के निपटारे के समय उस व्यक्ति का पक्ष सुना जाना चाहिए जिसका नाम सूची से गायब है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे.

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