कोलकाता/मालदा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रथम चरण के मतदान से महज तीन सप्ताह पहले राज्य ‘वोटर लिस्ट’ विवाद की आग में झुलस उठा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के विरोध में गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को बंगाल के कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए। मालदा के कालियाचक में जजों को बंधक बनाने की घटना के अगले ही दिन प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे को टायर जलाकर जाम कर दिया, जिससे उत्तर और दक्षिण बंगाल का संपर्क घंटों बाधित रहा।
ग्राउंड रिपोर्ट: जिलों में भड़की विरोध की चिंगारी बंगाल के विभिन्न हिस्सों से आ रही खबरें प्रशासन की चिंता बढ़ा रही हैं:
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मालदा (जदुपुर और मंगलबाड़ी): इंग्लिश बाजार के जदुपुर में प्रदर्शनकारियों ने वैध दस्तावेजों के साथ प्रदर्शन किया। मंगलबाड़ी में एडीएम के आश्वासन के बाद 4 घंटे से जारी जाम को हटाया गया।
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जलपाईगुड़ी (मयनागुड़ी): हुसुलडांगा में नेशनल हाईवे-27 (NH-27) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।
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कूचबिहार (माथाभंगा): मदरसा मोड़ और पचगढ़ ग्राम पंचायत में करीब 3 घंटे तक सड़क जाम रही।
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पूर्वी बर्धमान (शक्तिगढ़): यहाँ लोगों ने शोर-शराबे के बजाय ‘मौन मार्च’ निकालकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
ममता बनर्जी का प्रहार: “राष्ट्रपति शासन की रची जा रही साजिश” इन प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर बंगाल में अशांति फैलाने का ‘बड़ा षड्यंत्र’ रचा जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि भाजपा इन दंगों और उग्र प्रदर्शनों की आड़ में चुनाव से ठीक पहले राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का बहाना ढूंढ रही है। उन्होंने चुनाव आयोग पर अपनी शक्तियां छीनने का भी आरोप लगाया।
NH-12 पर भारी तनाव, सुरक्षा बल तैनात कोलकाता और सिलीगुड़ी को जोड़ने वाली लाइफलाइन NH-12 पर बुधवार से जारी नाकाबंदी ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। कालियाचक कांड (जजों को घेरे जाने की घटना) के बाद पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग? आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक वोटर लिस्ट से गायब किए गए हर वैध मतदाता का नाम वापस नहीं जोड़ा जाता, तब तक यह विरोध प्रदर्शन और सड़कों पर नाकाबंदी जारी रहेगी। प्रशासन अब उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है जिन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान डेटा एंट्री की थी।
